वैदिक ज्योतिष में शनि ग्रह को विशेष स्थान मिला हुआ है। वैसे तो सभी ग्रहों का ही अपना विशेष स्थान है लेकिन शनि के गोचर को लगभग सभी मामलों में बहुत ही अधिक महत्व दिया गया है, प्रभावशाली माना गया है इसीलिए जब भी राशिफल की गणना की जाती है, ज्योतिषों का ध्यान सर्वप्रथम शनि की स्थिति पर जाता है इसलिए शनि ग्रह के गोचर की इस विशेष चर्चा के साथ हम आपके समक्ष उपस्थित हैं।
साल 2027 की शुरुआत के समय शनि ग्रह मीन राशि और उत्तरा भाद्रपद नक्षत्र के चतुर्थ चरण में रहेंगे। वहीं वर्ष 2027 की समाप्ति के समय शनि ग्रह मीन राशि और रेवती नक्षत्र के चतुर्थ चरण में रहेंगे। हालांकि इसी बीच में 26 मार्च 2027 की शाम 7:21 पर शनि ग्रह मीन राशि में अस्त हो जाएंगे और 5 मई 2027 की सुबह 4:36 तक यहीं अर्थात मीन राशि में ही अस्त रहेंगे।
Read in English: Saturn Transit 2027
यह अवधि 40 दिनों की रहने वाली है लेकिन 3 जून 2027 की सुबह 6:30 पर शनि ग्रह मेष राशि में प्रवेश करेंगे। क्योंकि यह गोचर में राशि का परिवर्तन हो रहा है, इसलिए इस घटना का काफी बड़ा प्रभाव माना जाएगा। शनि ग्रह मेष राशि में नीच अवस्था वाली स्थिति में माने गए हैं इसलिए भी शनि के गोचर की यह महत्वपूर्ण घटना होगी। शनि एक राशि में लगभग ढाई वर्ष रहते हैं। यह किसी भी ग्रह के लिए गोचर करने की सबसे लंबी अवधि मानी गई है। इससे अधिक कोई भी ग्रह एक राशि में नहीं रहता है। हालांकि शनि ग्रह 3 जून 2027 की सुबह 6:30 से लेकर 20 अक्टूबर 2017 की सुबह 6:05 तक ही मेष राशि में रहेंगे। क्योंकि 3 जून 2027 को मेष राशि में प्रवेश करने के बाद शनि ग्रह 9 अगस्त 2027 की रात्रि लगभग 11:35 पर मेष राशि में वक्री हो जाएंगे और वक्री अवस्था में ही ये 20 अक्टूबर 2027 को मीन राशि में लौट जाएंगे।
24 दिसंबर तक शनि ग्रह वक्री रहेंगे लेकिन 24 दिसंबर 2027 की सुबह 6:16 पर शनि मार्गी की हो जाएंगे और वर्ष 2027 के अंतिम दिन तक शनि मीन राशि में ही बने रहेंगे। अगले वर्ष यानी 2028 में 23 फरवरी 2028 की शाम 8:00 बजे शनि पुन: मेष राशि में जाएंगे लेकिन क्योंकि हमारी चर्चा का विषय शनि का गोचर 2027 है, तो स्थूल रूप से आप जान लीजिए कि शनि ग्रह इस वर्ष क्रमशः मीन एवं मेष राशि में रहने वाले हैं। 3 जून 2027 से 20 अक्टूबर 2027 तक शनि ग्रह मेष राशि में रहेंगे, उसके आगे पीछे के समय में यानी उसके पहले और बाद के दोनों ही समय में शनि ग्रह मीन राशि में रहेंगे।
2027 में क्या बदलेगी आपकी किस्मत? हमारे विशेषज्ञ ज्योतिषियों से कॉल पर करें बात और जानें सबकुछ
वैदिक ज्योतिष में शनि ग्रह को धैर्य, अनुशासन, संघर्ष, कर्म, न्याय और दीर्घकालिक उपलब्धियों का कारक माना गया है। हालांकि शनि स्वभाव से धीमे हैं लेकिन इनका प्रभाव बहुत गहरा, स्थाई और जीवन को बदलने वाला माना जाता है। विद्वानों का मानना है कि बृहस्पति अवसर देता है लेकिन शनि परखता है कि व्यक्ति उन अवसरों के लायक है अथवा नहीं। यही कारण है कि शनि ग्रह को कर्मों के फल देने वाला अर्थात कर्मफल दाता कहा गया है। मान्यता है कि शनि ग्रह किसी के साथ पक्षपात नहीं करता बल्कि प्रत्येक व्यक्ति को उनके कर्मों के अनुसार परिणाम देता है।
शनि का राशि परिवर्तन का प्रभाव केवल किसी व्यक्ति के व्यक्तिगत जीवन तक ही सीमित नहीं होता बल्कि शनि के गोचर का प्रभाव / शनि की राशि बदलने का प्रभाव समाज, उद्योग, खेती किसानी अर्थात कृषि, राजनीति, अर्थव्यवस्था के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों पर भी व्यापक प्रभाव पड़ता है। क्योंकि साल 2027 में शनि ग्रह क्रमशः मीन एवं मेष राशि में रहने वाले हैं, वैसे तो यह दोनों ही राशियां शनि ग्रह के लिए बहुत अनुकूल नहीं मानी गई हैं। क्योंकि मीन राशि जल तत्व की राशि है, ऊपर से बृहस्पति और शनि के संबंध नैसर्गिक रूप से सम अर्थात तटस्थ माने गए हैं। तत्कालिकता के अनुसार देखें तो मीन राशि में रहने की अवधि में शनि और बृहस्पति के बीच के संबंध शत्रु वाले माने जाएंगे।
यानी मीन राशि में रहने की अवधि में शनि शत्रु राशि में कहे जाएंगे जबकि मेष राशि में रहने की अवधि में शनि नीच राशि में माने जाएंगे या नीच राशि के कहे जाएंगे। शनि की इन दोनों स्थितियों का आपकी लग्न या आपकी राशि पर क्या प्रभाव पड़ेगा यह जानने से पहले लिए यह जान लेते हैं कि शनि की इन स्थितियों का साढ़ेसाती या ढैया के रूप में किस राशि पर क्या प्रभाव माना जाएगा?
शनि के मीन राशि में रहने की अवधि में शनि की साढ़ेसाती का प्रभाव: साल 2027 में जब शनि ग्रह मीन राशि में रहेंगे अर्थात साल की शुरुआत से लेकर 3 जून 2027 तक तथा 20 अक्टूबर 2027 के बाद वाली समय अवधि में क्रमशः कुंभ, मीन एवं मेष राशि पर शनि की साढ़ेसाती का प्रभाव रहेगा।
शनि के मीन राशि में रहने की अवधि में शनि की ढैय्या का प्रभाव: साल 2027 में जब शनि ग्रह मीन राशि में रहेंगे अर्थात साल की शुरुआत से लेकर 3 जून 2027 तक तथा 20 अक्टूबर 2027 के बाद वाली समय अवधि में क्रमशः धनु एवं सिंह राशि पर शनि की ढैय्या का प्रभाव रहेगा।
शनि के मेष राशि में रहने की अवधि में शनि की साढ़ेसाती का प्रभाव: साल 2027 में जब शनि ग्रह मेष राशि में रहेंगे अर्थात 3 जून 2027 से लेकर 20 अक्टूबर 2027 तक वाली अवधि में क्रमशः मीन, मेष एवं वृषभ राशि पर शनि की साढ़ेसाती का प्रभाव रहेगा।
शनि के मेष राशि में रहने की अवधि में शनि की ढैय्या का प्रभाव: साल 2027 में जब शनि ग्रह मेष राशि में रहेंगे अर्थात 3 जून 2027 से लेकर 20 अक्टूबर 2027 तक वाली अवधि में क्रमशः क्रमशः मकर एवं कन्या राशि पर शनि की ढैय्या का प्रभाव रहेगा।
बृहत् कुंडली में छिपा है, आपके जीवन का सारा राज, जानें ग्रहों की चाल का पूरा लेखा-जोखा
शनि की साढ़ेसाती और ढैय्या को लेकर लोगों में तरह-तरह के भ्रम भी देखने को मिलते हैं। अतः उन लोगों के लिए स्पष्ट करना जरूरी है कि साढ़ेसाती या ढैय्या सदैव कष्टकारी नहीं होती। यह कई बार अच्छी उपलब्धियां भी देती है। यदि जन्म कुंडली में शनि ग्रह शुभ हो तथा व्यक्ति के कर्म संतुलित हों, तो साढ़ेसाती या ढैय्या के दौरान उल्लेखनीय उपलब्धियां भी प्राप्त हो सकती हैं। ऐसे तमाम उदाहरण देखने को मिलते हैं जहां अनेक उद्योगपति, वैज्ञानिक, राजनेता और कलाकारों ने अपने जीवन की सबसे बड़ी सफलताएं साढ़ेसाती या ढैय्या के दौरान प्राप्त की है लेकिन यदि व्यक्ति अनुशासनहीन हो जोखिम भरे निर्णय ले, उसके कर्म असंतुलित हों और साथ ही साथ कुंडली में शनि की स्थिति भी अच्छी न हो तो ऐसी स्थिति में शनि की साढ़ेसाती या ढैय्या वाला समय कठिन अनुभव भी दे सकता है।
ढैय्या सिर्फ ढाई साल की होती है जबकि साढ़ेसाती साढ़े सात वर्ष की होती है। अतः साढ़ेसाती को लेकर लोगों के मन में अधिक जिज्ञासा रहती है जिसकी चर्चा हमने ऊपर कर दी है कि शनि के राशि परिवर्तन से किस राशि पर साढ़ेसाती का प्रभाव शुरू होगा और किस पर से दूर हो जाएगा? वहीं शनि के वापस मीन राशि में आने पर क्या स्थिति रहेगी, इन सबकी चर्चा हमने कर दी है।
अब इस बात का स्पष्टीकरण भी जरूरी है कि इस राशिफल को लग्न राशि के अनुसार देखना चाहिए या फिर चंद्र राशि के अनुसार? तो आपको बता दें की साढ़ेसाती और ढैय्या की गणना के लिए आपको चंद्र राशि को ही आधार मनाना चाहिए लेकिन बाकी की फलादेश के लिए आधुनिक परिपेक्ष में लग्न का प्रभाव अधिक देखने को मिलता है। अतः हमारा राशिफल लग्न पर आधारित रहता है।
सीधे शब्दों में कहें तो यह राशिफल लग्न कुंडली पर आधारित है जिसे आप लग्न राशि के अनुसार देखेंगे तो ज्यादा अच्छा रहेगा। हालांकि यदि आपको अपनी लग्न राशि नहीं पता है तो आप इस राशिफल को चंद्र राशि या फिर अपने नाम की राशि के अनुसार भी देख सकते हैं। साढ़ेसाती एवं ढैय्या की गणना हमने चंद्र राशि के अनुसार की है। उसकी चर्चा भी हमने कर दी है अत: बिना किसी कन्फ्यूजन के आप यह समझ सकते हैं कि किस समय अवधि में किन-किन राशियों पर साढ़ेसाती का प्रभाव रहेगा और किन-किन राशियों पर ढैय्या का प्रभाव रहेगा।
यह भी स्पष्ट करना जरूरी है कि व्यक्तिगत जन्म कुंडली, दशा, अंतर्दशा, अष्टकवर्ग, ग्रहबल और अन्य गोचरों के प्रभाव के अनुसार अंतिम परिणामों में परिवर्तन भी संभव है। इसलिए इस राशिफल को सामान्य वार्षिक मार्गदर्शन के रूप में ही देखे न कि अंतिम व्यक्तिगत भविष्यवाणी के रूप में।
साल की शुरुआत से लेकर 3 जून 2027 तक तथा 20 अक्टूबर 2027 शनि ग्रह का गोचर आपके द्वादश भाव में रहेगा। चंद्र कुंडली के अनुसार यह साढ़ेसाती वाली स्थिति मानी जाती है। वैसे तो लगभग हर स्थिति में ही शनि के गोचर को द्वादश भाव में अनुकूल परिणाम देने वाला नहीं कहा गया है। यहां पर शनि ग्रह को धन हानि करवाने वाला, खर्चों की अधिकता देने वाला, संतान संबंधी मामलों में परेशानियां देने वाला कहा गया है। साथ ही साथ घर से दूर रखने का काम भी शनि का यह गोचर करता है। घर परिवार से अनबन देने जैसी प्रतिकूलता के लक्षणों की बात भी गोचर शास्त्र में कही गई है। आपकी कुंडली में दशम एवं एकादश भाव का स्वामी होकर शनि द्वादश भाव में रहेगा तो स्वाभाविक है कि कार्य व्यापार के लिए आपको अक्सर घर से दूर रहना पड़ सकता है और मेहनत भी तुलनात्मक रूप से अधिक करनी पड़ सकती है। आमदनी के स्रोतों में भी कुछ धीमापन देखने को मिल सकता है। सीधे शब्दों में कहा जाय तो शनि की यह स्थिति आपके लिए अनुकूल नहीं कही जाएगी।
वहीं 3 जून 2027 से लेकर 20 अक्टूबर के बीच शनि ग्रह का गोचर मेष राशि में अर्थात आपके प्रथम भाव पर रहने वाला है। इस स्थिति को भी चंद्र कुंडली के अनुसार शनि की साढ़ेसाती वाली स्थिति मानी गई है। इस समय शनि नीच के होकर आपके प्रथम भाव में रहेंगे। जिसे सामान्य तौर पर अच्छे परिणाम देने वाला नहीं माना गया है। क्योंकि यहां पर शनि स्वास्थ्य से संबंधित कुछ परेशानियां देने का काम कर सकता है। चोट खरोच लगने, जलने इत्यादि का डर रह सकता है। भाई बंधुओ से अनबन देखने को मिल सकती है। घर से दूर रहना पड़ सकता है।
आर्थिक मामलों के लिए भी इस गोचर को अच्छा नहीं कहा गया है, पर क्योंकि प्रथम भाव में शनि का नीच वाला प्रभाव रहेगा। ऐसी स्थिति में स्वास्थ्य का सबसे अधिक ख्याल रखने की आवश्यकता रहेगी। दांपत्य जीवन की बात हो या फिर कार्य व्यापार की बात; इन मामलों में भी आपको पूरा ध्यान देने की आवश्यकता रहेगी। आलस्य का प्रभाव तो रह ही सकता है। साथ ही साथ मान सम्मान के दृष्टिकोण से भी इस गोचर को अच्छा नहीं माना गया है। सीधे शब्दों में कहें तो शनि का यह गोचर भी आपके लिए अनुकूलता देने में असमर्थ रह सकता है।
उपाय: स्वयं को शुद्ध और सात्विक बनाए रखना उपाय की तरह काम करेगा। संभव हो तो प्रत्येक महीने नहीं तो कम से कम हर तीसरे महीने रुद्राभिषेक करना या करवाना भी शुभ रहेगा।
साल की शुरुआत से लेकर 3 जून 2027 तक तथा 20 अक्टूबर 2027 शनि ग्रह का गोचर आपके लाभ भाव में रहेगा। शनि की यह स्थित आपको काफी अच्छे परिणाम देने का काम कर सकती है। यहां पर शनि ग्रह को शनि से संबंधित वस्तुओं अर्थात लोहा, चमड़ा, कोयला, सीमेंट, पत्थर, लकड़ी, मशीनरी इत्यादि के माध्यम से लाभ करवाने वाला माना गया है। तो यदि आपका काम इन क्षेत्रों से संबंधित है तो शनि आपको बहुत अच्छे परिणाम दे सकता है। नहीं तो आप जो भी कर रहे हैं उस मामले से या उस माध्यम से आपको अच्छी आमदनी, अच्छा लाभ करवाने में शनि मददगार बनेंगे।
शनि की यह स्थिति रोग और शत्रुओं के भय से मुक्ति देने वाली कही गई है। इसलिए इस अवधि में आपको हर तरह से आनंद मिलने की संभावनाएं बन रही हैं। कामों में सफलता एवं मित्रों का सहयोग मिल सकता है। धर्म कर्म के प्रति रुचि बढ़ सकती है। पिता और पिता तुल्य इंसान हो या लोग, उनसे आपको अच्छा समर्थन या प्रोत्साहन भी मिल सकता है। शासन प्रशासन से संबंधित मामलों में भी अच्छी अनुकूलता देखने को मिल सकती है।
वहीं 3 जून 2027 से लेकर 20 अक्टूबर के बीच शनि ग्रह का गोचर मेष राशि में अर्थात आपके द्वादश भाव में रहने वाला है। शनि की यह स्थिति अनुकूल नहीं कही जाएगी। क्योंकि यहां पर शनि की साढ़ेसाती का पहला चरण शुरू हो जाता है। जिसे सामान्य तौर पर परेशानियां देने वाला कहा गया है। द्वादश भाव खर्च का भाव होता है। ऐसे में शनि व्यर्थ के खर्च करवाने का काम कर सकता है। यदि जरूरी कामों में भी खर्च करना पड़ेगा तो भी आर्थिक मामलों में कमजोरी देने का काम शनि का यह गोचर कर सकता है।
संतान एवं शिक्षा से संबंधित मामलों में भी कुछ परेशानियां देखने को मिल सकती हैं। कभी-कभार व्यर्थ की यात्राएं भी करनी पड़ सकती हैं। सामान्य तौर पर जरूरी यात्राएं बड़ी मात्रा में करने की स्थिति निर्मित हो सकती है। हालांकि उन यात्राओं से हर बार लाभ मिले इस बात में संदेह रहेगा। परिजनों के साथ बेहतर सामंजस्य बनाने की जरूरत रहेगी। क्योंकि शनि की तीसरी दृष्टि दूसरे भाव पर रहेगी जो आर्थिक एवं पारिवारिक दोनों ही मामलों में कमजोरी देने का काम कर सकती है। आपके भाग्य एवं कर्म भाव का स्वामी नीच का रहेगा। ऐसे में कामों में तुलनात्मक रूप से अधिक मेहनत करनी पड़ सकती है। भाग्य का सहयोग भी कम मिल सकता है। हालांकि अन्य गोचरों के अनुसार परिणामों में कुछ परिवर्तन भी देखने को मिल सकता है लेकिन शनि के गोचर के बारे में गोचर शास्त्र कुछ ऐसी ही बातें बताता है, जैसी कि हमने आपको बताई हैं।
उपाय: मांस, मदिरा व अश्लीलता इत्यादि से दूरी बनाए रखना अर्थात स्वयं को शुद्ध एवं सात्विक रखना उपाय की तरह काम करेगा। नियमित रूप से महामृत्युंजय मंत्र का जाप करना भी शुभ रहेगा।
साल की शुरुआत से लेकर 3 जून 2027 तक तथा 20 अक्टूबर 2027 शनि ग्रह का गोचर मिथुन राशि के दशम भाव में रहेगा। सामान्य तौर पर दशम भाव में शनि के गोचर को बहुत अच्छा नहीं माना गया है। हालांकि काल पुरुष की कुंडली में यह शनि का स्वयं का घर होता है और शनि, इस भाव का कारक भी होता है। तो ऐसी स्थिति में मेहनती लोगों को शनि संतोषप्रद परिणाम देने वाला कहा जा सकता है लेकिन सामान्य तौर पर यहां पर शनि की गोचर को बहुत अच्छा नहीं माना गया है बल्कि मानसिक चिंता देने वाला, व्यर्थ के खर्च करवाने वाला, पति/पत्नी को लेकर परेशानियां देने वाला, नौकरी व्यापार में व्यवधान देने वाला, सम्मान में बाधा उत्पन्न करने वाला तथा कामों में असफलता देने वाला माना गया है।
साथ ही साथ शनि के इस गोचर को शासन प्रशासन से संबंधित मामलों में भी प्रतिकूल परिणाम देने वाला कहा गया है। हालांकि हमने अपने व्यक्तिगत अनुभव में पाया है कि धैर्य के साथ, निष्ठा पूर्वक अपना काम करने वाले लोगों को शनि का यह गोचर अच्छे परिणाम भी देता है। ऐसे में बिना चिंतित या परेशान हुए अपने कामों पर पूरा फोकस बनाएं; ऐसा करने की स्थिति में अच्छे परिणाम भी मिल सकते हैं। फिर भी घर गृहस्थी, जीवन संगिनी एवं खर्चों पर संतुलन जरूरी रहेगा।
वहीं 3 जून 2027 से लेकर 20 अक्टूबर के बीच शनि ग्रह का गोचर मेष राशि में अर्थात आपके लाभ भाव में रहने वाला है। क्योंकि लाभ भाव में शनि के गोचर को सामान्य तौर पर अच्छे परिणाम देने वाला माना जाता है। अतः शनि का यह गोचर आपको लाभ करवाएगा लेकिन शनि नीच अवस्था में भी रहेंगे। ऐसे में लाभ के ग्राफ में कुछ कमी देखने को मिल सकती है। भाग्येश का नीच का होना भी भाग्य का पूरा सपोर्ट नहीं दिलवाएगा। ऐसी स्थिति में कर्म करना बहुत जरूरी रहेगा। हां यह बात तय है कि कर्म करने की स्थिति में लाभ भाव में पहुंचा हुआ शनि आपको अच्छा लाभ करवाएगा यानी शनि का यह गोचर आपको अच्छे परिणाम देगा लेकिन इसकी कुछ टर्म्स एंड कंडीशंस रहेंगी। जैसे की मेहनत करना, निष्ठा पूर्वक काम करना और कंटीन्यूअसली काम करना बहुत जरूरी रहेगा। ऐसा करने की स्थिति में आपको अनुकूल परिणाम मिल सकेंगे।
उपाय:नियमित रूप से मंदिर जाना शुभ रहेगा। नेत्रहीन लोगों को भोजन करवाना भी शुभ रहेगा।
करियर की हो रही है टेंशन! अभी ऑर्डर करें कॉग्निएस्ट्रो रिपोर्ट
साल की शुरुआत से लेकर 3 जून 2027 तक तथा 20 अक्टूबर 2027 शनि ग्रह का गोचर कर्क राशि के भाग्य भाव अर्थात नवम भाव में रहेगा। गोचर शास्त्र में शनि के इस गोचर को भी अच्छा नहीं माना गया। गोचर शास्त्र में शनि के नवम भाव में गोचर होने के फलों की चर्चा करते हुए कहा गया है कि ऐसा शनि भाग्य की हानि करवाता है। यानी इस अवधि में आपको तुलनात्मक रूप से अधिक मेहनत करनी पड़ सकती है। कई बार कामों में पहली बार में ही सफलता नहीं मिलती बल्कि एक से अधिक बार प्रयास करने पड़ते हैं। प्रतिस्पर्धियों और विरोधियों का सामना भी करना पड़ता है। धार्मिक कार्यों के संपन्न होने में भी बाधाएं देखने को मिलती है।
सीधे शब्दों में कहा जाए तो भले ही शनि का यह गोचर कोई बहुत बड़ा नुकसान नहीं देता लेकिन सामान्य तौर पर फायदा करवाने में भी बहुत मेहनत लेता है लेकिन मेहनती लोगों को अंतत: सफलता मिल जाती है। क्योंकि यह गोचर किसी भी काम के लिए ज़रूरी या लगने वाले समय से काफी ज्यादा समय उस काम में लगवाता है। शायद इसीलिए इस गोचर को भी अनुकूल गोचर की श्रेणी में नहीं रखा गया है। फिर भी आप इसे मिले-जुले परिणाम देने वाला गोचर कह सकते हैं।
वहीं 3 जून 2027 से लेकर 20 अक्टूबर के बीच शनि ग्रह का गोचर मेष राशि में अर्थात आपके दशम भाव में रहने वाला है। प्लेसमेंट के अनुसार तो शनि के इस गोचर को तुलनात्मक रूप से बेहतर स्थिति वाला गोचर कहा जा सकता है लेकिन क्योंकि शनि नीच अवस्था में रहेंगे, यह एक कमजोर बिंदु है। ऐसे में शनि जहां-जहां के स्वामी है और जहां बैठे हुए हैं उन स्थानों में काफी ज्यादा कठिनाइयां दे सकते हैं। इसलिए अंततः मिलने वाले परिणामों को हम मिले-जुले और औसत से कमजोर परिणामों की श्रेणी में रखना चाहेंगे।
शनि का यह गोचर दांपत्य संबंधी मामलों में कुछ परेशानियां दे सकता है। कामों में व्यवधान या अड़चनें देखने को मिल सकती हैं। व्यापार और नौकरी में किसी भी तरीके का रिस्क लेना ठीक नहीं रहेगा। अपने मान सम्मान का ख्याल रखना भी जरूरी रहेगा और किसी भी काम को संपन्न करने के लिए तुलनात्मक रूप से अधिक समय लेकर चलना भी समझदारी का काम होगा। सीधे शब्दों में कहें तो यह गोचर भी बहुत अनुकूल नहीं है परेशानियां और कठिनाइयां देखने को मिलेगी लेकिन लगातार किए गए प्रयास में सफलताएं भी मिल सकेंगी।
उपाय: माथे पर नियमित रूप से केसर का तिलक लगाएं और स्वयं को शुद्ध और सात्विक बनाए रखें।
साल की शुरुआत से लेकर 3 जून 2027 तक तथा 20 अक्टूबर 2027 शनि ग्रह का गोचर सिंह राशि के अष्टम भाव में रहेगा। अष्टम भाव में शनि के गोचर को अच्छा नहीं माना जाता। चंद्र कुंडली के अनुसार या शनि की ढैया वाली स्थिति मानी गई है। जिसे सामान्य तौर पर नकारात्मक परिणाम देने वाला माना जाता है। हालांकि विद्वान लोग इसे कर्मों का हिसाब करने वाली स्थिति मानते हैं लेकिन सीधे शब्दों में कहा जाय तो यह वह समय होता है जब कठिनाइयां काफी ज्यादा रहती हैं लेकिन आपकी मेहनत व्यर्थ नहीं जाती। अलबत्ता स्वास्थ्य इत्यादि से संबंधित मामलों में इस गोचर को अच्छा नहीं कहा गया है। इसलिए इस अवधि में आपको अपने खान-पान का उचित ख्याल रखना चाहिए। विशेषकर जिन लोगों को पहले से पेट या गुप्तांगो से संबंधित कोई समस्या है, उन्हें अपने स्वास्थ्य का विशेष ख्याल रखना चाहिए।
आर्थिक मामले में भी बहुत समझदारी पूर्वक निर्वाह करने की आवश्यकता रहेगी। ऐसे कामों में निवेश करना या रिक्स लेना ठीक नहीं रहेगा जहां सफलता की संभावनाएं कम हों। अपनी तरफ से सरकारी कामों में बाधा नहीं उत्पन्न करनी है, सरकार का किसी भी तरह से विरोध नहीं करना है बल्कि सरकार के साथ तालमेल बिठाकर चलना या फिर किसी भी तरह के सरकारी कामों को लेकर रिस्क नहीं लेना है। यदि आप विद्यार्थी हैं तो अपेक्षाकृत अधिक मेहनत की आवश्यकता रहेगी। वरिष्ठों और टीचर्स के साथ अच्छे संबंध रखने हैं।
वहीं 3 जून 2027 से लेकर 20 अक्टूबर के बीच शनि ग्रह का गोचर मेष राशि में अर्थात आपके नवम भाव में रहने वाला है। वैसे तो नवम भाव में भी शनि के गोचर को अच्छा नहीं माना गया है लेकिन अष्टम भाव की तुलना में नवम भाव; राहत देने का काम करता है। यानी पहले सेगमेंट वाली शनि की स्थिति की तुलना में भाग्य भाव में शनि का गोचर राहत देने का काम करता है। भले ही समस्याएं पूर्णत: ठीक होने में संदेह रहता हो लेकिन राहत तो मिलती है किंतु आपके मामले में शनि इस स्थिति में भी अर्थात भाग्य भाव में रहने की स्थिति में भी नीच अवस्था का रहता है। अतः आपकी परेशानियां दूसरे रूप में जारी रह सकती हैं। अर्थात जैसी समस्याएं पहले कह गए टाइम अवधि में रहेंगी, लगभग उसी तरह की समस्याएं इस अवधि में भी रह सकती हैं। बस उनका स्वरूप अलग हो सकता है।
जैसे कि इस अवधि में पिता और गुरुजनों के साथ संबंधों में परेशानियां देखने को मिल सकती हैं। अतः उनके साथ अपने संबंधों को बहुत समझदारी से निभाने की जरूरत रहेगी। पिता के स्वास्थ्य का ख्याल रखना भी जरूरी रहेगा। परिजनों के साथ बेहतर तालमेल बिठाने की आवश्यकता रहेगी। भाग्य के भरोसे नहीं बैठना है। यदि आप किसी तरीके का धार्मिक आयोजन करने जा रहे हैं तो उसमें भी बाधाओं के लिए तैयार रहना चाहिए और तुलनात्मक रूप से अधिक समय लेकर चलने की भी जरूरत रहेगी।
उपाय: चांदी का एक चौकोर टुकड़ा अपने साथ रखें। माथे पर नियमित रूप से केसर का तिलक लगाएं।
साल की शुरुआत से लेकर 3 जून 2027 तक तथा 20 अक्टूबर 2027 शनि ग्रह का गोचर कन्या राशि के सप्तम भाव में रहेगा। सप्तम भाव में शनि के गोचर को अच्छा नहीं माना जाता है। गोचर शास्त्र के अनुसार इस अवधि में आपको जननेंद्रियों अथवा गुप्तांगों से संबंधित कुछ परेशानियां रह सकती हैं। मूत्र विकार, पथरी इत्यादि की समस्याएं जिन लोगों को पहले से हैं, उन्हें इस अवधि में अपने स्वास्थ्य को लेकर जागरूक रहने की आवश्यकता रहेगी। मुख से संबंधित कुछ परेशानियां भी देखने को मिल सकती हैं। यदि विवाहित हैं तो जीवनसाथी या जीवन संगिनी के साथ बेहतर तालमेल बिठाकर चलें। उनके स्वास्थ्य का ख्याल रखें, उनकी भावनाओं का ख्याल रखें।
यदि आप व्यापार या व्यवसाय से जुड़े हुए व्यक्ति हैं तो किसी भी तरीके का व्यापारिक रिस्क लेना ठीक नहीं रहेगा। साझेदारी का काम करते हैं तो उसमें भी बहुत सावधानी पूर्वक निर्वाह करने की आवश्यकता रहने वाली है। हालांकि पंचम भाव का स्वामी सप्तम भाव में रहेगा, ऐसे में जो लोग प्रेम विवाह करने को लेकर सीरियस हैं उन्हें कुछ अच्छे परिणाम भी मिल सकते हैं लेकिन सामान्य तौर पर शनि के इस गोचर को अच्छा नहीं माना गया है।
वहीं 3 जून 2027 से लेकर 20 अक्टूबर के बीच शनि ग्रह का गोचर मेष राशि में अर्थात आपके अष्टम भाव में रहने वाला है। अष्टम भाव में शनि के गोचर को ढैया वाली स्थिति माना जाता है। यानी इस गोचर को प्रतिकूल परिणाम देने वाला कहा जाता है। ऐसे में इस अवधि में बहुत ही सावधानी पूर्वक निर्वाह करने की आवश्यकता रहेगी। यह अवधि गुप्तांगो से संबंधित परेशानी देने वाली कही गई है। खासकर जिन लोगों को गुदा से संबंधित कोई समस्या पहले से है या कब्ज इत्यादि की तकलीफ रहती है उन्हें इस अवधि में न केवल सावधान रहने की आवश्यकता है बल्कि उचित खान-पान अपनाने की भी आवश्यकता रहने वाली है। कामों में बार-बार अड़चनें देखने को मिल सकती हैं। कुछ कामों में असफलता भी देखने को मिल सकती है।
घर की स्त्रियों को पीड़ा या तकलीफ रह सकती है। सरकारी माध्यमों से भी कुछ समस्याएं देखने को मिल सकती हैं। घर के बड़े बुजुर्गों के स्वास्थ्य का ख्याल रखना भी जरूरी रहेगा। यदि आप विद्यार्थी हैं तो शिक्षा पर अधिक मेहनत करने की आवश्यकता रहेगी। संतान से जुड़ी हुई समस्या भी कभी कभार देखने को मिल सकती है। यानी इस गोचर की अवधि में पहले बताए गए अवधि की तुलना में ज्यादा सजग रहने की आवश्यकता रहेगी। क्योंकि पहले वाला गोचर अर्थात सप्तम भाव में गोचर करने की अवस्था में शनि के परिणाम भले ही फेवर में न रहे हैं लेकिन कम समय के लिए या कम मात्रा में ही विरुद्ध में रहेंगे जबकि 3 जून से 20 अक्टूबर वाले टाइम अवधि में शनि के परिणाम विरुद्ध भी रह सकते हैं। अतः इस अवधि में तुलनात्मक रूप से अधिक सचेत रहने की आवश्यकता रहने वाली है।
उपाय: काली गाय की सेवा करें, संभव हो तो प्रतिदिन करें नहीं तो कम से कम शनिवार के दिन जरूर करें। तथा चांदी का चौकोर टुकड़ा अपने साथ रखें।
अब घर बैठे विशेषज्ञ पुरोहित से कराएं इच्छानुसार ऑनलाइन पूजा और पाएं उत्तम परिणाम!
साल की शुरुआत से लेकर 3 जून 2027 तक तथा 20 अक्टूबर 2027 शनि ग्रह का गोचर तुला राशि के छठे भाव में रहेगा। क्योंकि छठे भाव में शनि के गोचर को बहुत अच्छे परिणाम देने वाला माना जाता है। अत: इस अवधि में शनि सामान्य तौर पर आपको काफी अच्छे परिणाम देना चाहेगा। इस अवधि में शनि आपकी घर गृहस्थी के मामले में भी अच्छा करेगा। साथ ही साथ संतान, प्रेम एवं शिक्षा के मामले में भी काफी अच्छे परिणाम दे सकता है। विशेष कर प्रतिस्पर्धात्मक परीक्षाओं में भाग लेने वाले विद्यार्थियों को काफी अच्छे परिणाम मिल सकते हैं।
यदि आप बैंक से लोन लेने की कोशिश में हैं तो आपको बैंक लोन भी आसानी मिल सकता है। किसी व्यक्ति विशेष से कुछ पैसे उधार लेना चाह रहे हैं तो वहां से भी आपको धन की प्राप्ति हो सकती है। खेती करने वाले किसानों को भी शनि का यह गोचर अच्छे परिणाम दिलाएगा। हालांकि खेती किसानी मौसम पर भी निर्भर करती है लेकिन छठे भाव का शनि अन्य लोगों की तुलना में आपको बेहतर परिणाम दिलाने का प्रयास करेगा। स्वास्थ्य में भी अनुकूलता देखने को मिलेगी। प्रतिस्पर्धियों से आगे ले जाने में भी शनि का यह गोचर आपकी अच्छी मदद कर सकता है। कुल मिलाकर लगभग सभी मामलों में ही शनि के इस गोचर से आपको अच्छे परिणाम मिलने की संभावनाएं बन रही हैं।
वहीं 3 जून 2027 से लेकर 20 अक्टूबर के बीच शनि ग्रह का गोचर मेष राशि में अर्थात आपके सप्तम भाव पर रहने वाला है और इस गोचर को अच्छे परिणाम देने वाला नहीं माना जाता। सप्तम भाव में शनि के गोचर को अच्छा नहीं माना जाता। ऊपर से आपके चतुर्थ और पंचम जैसे महत्वपूर्ण भावों के स्वामी होकर शनि नीच अवस्था में रहेंगे। यह भी एक कमजोर बिंदु है। सप्तम भाव का शनि कमर के निचले हिस्से में स्वास्थ्य से संबंधित परेशानियां देने वाला माना गया है। यदि आपको कमर के निचले हिस्से में कोई स्वास्थ्य समस्या है तो उस पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता रहेगी।
यात्राएं कम से कम करना सही रहेगा। वाहन इत्यादि सावधानी से चलाना भी समझदारी का काम होगा। यदि आप विवाहित हैं तो जीवनसाथी या जीवन संगिनी के स्वास्थ्य का ख्याल रखें। उनके साथ बेहतर तालमेल बिठाने की कोशिश करें। यदि आप व्यापार व्यवसाय से जुड़े हुए व्यक्ति हैं तो इस अवधि में किसी भी तरीके का व्यापारिक या व्यावसायिक रिस्क लेना ठीक नहीं रहेगा। घर गृहस्थी का पूरा ख्याल रखना है, भावनाओं को संतुलित रखना है, संतान से संबंधित मामलों में भी जागरूक रहने की आवश्यकता रहेगी।
यदि आप युवा हैं और किसी से प्रेम करते हैं तो उस मामले में भी सावधानी बरतने की जरूरत रहेगी। हालांकि पंचम भाव का स्वामी सप्तम भाव में रहेगा, ऐसे में निष्ठा पूर्वक प्रेम विवाह करने की इच्छा रखने वाले लोगों की इच्छा पूर्ति के योग भी बनेंगे लेकिन सामान्य तौर पर इस गोचर को अच्छा नहीं कहा गया है। ऐसे में लव लाइफ को लेकर के भी समझदारी के ग्राफ को बढ़ाने की आवश्यकता रहेगी। अनुचित खानपान पूरी तरह से त्यागने की भी जरूरत रहेगी। इस तरह के कुछ तौर तरीकों को अपनाकर आप बेहतर परिणाम प्राप्त कर सकेंगे।
उपाय: भगवान शिव की पूजा आराधना नियमित रूप से करें। साथ ही साथ काली गाय की सेवा भी किया करें। ऐसा करना आपके लिए शुभ रहेगा। \
वृश्चिक राशि
साल की शुरुआत से लेकर 3 जून 2027 तक तथा 20 अक्टूबर 2027 शनि ग्रह का गोचर वृश्चिक राशि के पंचम भाव में रहेगा। सामान्य तौर पर पंचम भाव में शनि के गोचर को अच्छे परिणाम देने वाला नहीं माना जाता है लेकिन पिछले गोचर अर्थात चतुर्थ भाव में गोचर की तुलना में यह गोचर बेहतर परिणाम देता है। जिसे आप मिले जुले परिणाम देने वाला कह सकते हैं। अन्य गोचरों के अनुसार परिणाम और भी बेहतर हो सकते हैं लेकिन पंचम भाव में शनि के गोचर से मिले-जुले परिणामों में अनुकूलता का ग्राफ तुलनात्मक रूप से कम रह सकता है। यानी अनुकूलता कम और परेशानियां तुलनात्मक रूप से अधिक रह सकती हैं लेकिन फिर भी बुद्धिमान लोग और धैर्य पूर्वक चिंतन मंथन करके योजना बनाने के पश्चात काम करने वाले लोग; अच्छे परिणाम भी प्राप्त कर सकेंगे।
हालांकि पंचम में शनि के गोचर को योजनाओं में असफलता देने वाला कहा गया है लेकिन धैर्य पूर्वक बनाई गई योजनाएं सामान्य तौर पर सफलता दे देती हैं। संतान से संबंधित मामलों में भी इस गोचर की अवधि में जागरूकता दिखाने की जरूरत रहेगी। यदि पहले से पेट आदि से संबंधित कोई परेशानियां है तो उस मामले में भी समझदारी की जरूरत रहेगी। उचित खान-पान अपनाने की जरूरत रहेगी। कुल मिलाकर यह गोचर बहुत अच्छा नहीं माना गया है। बीच-बीच में कुछ अच्छाइयां समझदारी दिखाने की स्थिति में ही मिलेंगी। जल्दबाजी की स्थिति में सामान्य तौर पर सफलताओं में विलंब मिल सकता है।
वहीं 3 जून 2027 से लेकर 20 अक्टूबर के बीच शनि ग्रह का गोचर मेष राशि में अर्थात आपके छठे भाव में रहने वाला है। वैसे तो सामान्य तौर पर छठे भाव में शनि के गोचर को अच्छे परिणाम देने वाला कहा गया है लेकिन शनि नीच अवस्था में रहेंगे। अत: अच्छाइयों का ग्राफ उतना मजबूत नहीं रहेगा, जितना सामान्य तौर पर होना चाहिए। फिर भी यहां पहुंचा हुआ शनि कई मामलों में व्यवधानों के बाद ही सही, अड़चनों के बाद ही सही; आपको अच्छे परिणाम दे सकेगा।
यदि आपका स्वास्थ्य पहले से खराब चल रहा है तो स्वास्थ्य में अनुकूलता देखने को मिलेगी। अलबत्ता सावधानी बरतने की आवश्यकता इस अवधि में भी रहेगी। यानी कि जागरूक और समझदार रहने की स्थिति में स्वास्थ्य अच्छा हो सकेगा, यह एक अनुकूल बात है। योजनाबद्ध तरीके से धैर्यपूर्वक काम करने की स्थिति में प्रतिस्पर्धियों से आगे निकलने में शनि का यह गोचर मददगार भी बनेगा। क्योंकि चतुर्थ भाव का स्वामी शनि नीच अवस्था में रहेगा।
अतः भूमि, भवन, वाहन से संबंधित मामलों में जल्दबाजी नहीं दिखानी है। फिर भी परिणाम तुलनात्मक रूप से बेहतर रहेंगे, यानी कुछ ऐसे सौदे जो वाकई जेनुइन हैं, जिनमें किसी तरीके का कोई रिस्क नहीं है; उन सौदों के साथ आप आगे बढ़ भी सकते हैं। कहने का तात्पर्य है कि शनि का या गोचर एवरेज से बेहतर लेवल के परिणाम दे रहा है। कुछ परिणाम नकारात्मक भी रहेंगे लेकिन ज्यादातर परिणाम सकारात्मक रहने की अच्छी संभावनाएं बन रही हैं।
उपाय: काली गाय की सेवा करें। महीने में किसी एक शनिवार को बहते हुए शुद्ध जल में जटा वाले सूखे हुए नारियल बहाएं।
साल की शुरुआत से लेकर 3 जून 2027 तक तथा 20 अक्टूबर 2027 शनि ग्रह का गोचर धनु राशि के चतुर्थ भाव में रहेगा। चतुर्थ भाव में शनि के गोचर को अच्छे परिणाम देने वाला नहीं माना जाता। चंद्र कुंडली के अनुसार यह शनि की ढैया वाली स्थिति मानी गई है। जिसे नकारात्मक परिणाम देने वाला माना गया है। ऐसे गोचर के बारे में कहा जाता है कि चतुर्थ भाव में जब भी शनि का गोचर आता है तो व्यक्ति को स्थान परिवर्तन करना पड़ सकता है। यानी इस गोचर की अवधि में कुछ ऐसे चेंजेज भी करने पड़ सकते हैं जिन चेंजेज को करने की इच्छा आपकी नहीं थी।
स्वजनों से विरोध भी हो सकता है और सज्जनों से वियोग भी देखने को मिल सकता है। सुख में कमी की अनुभूति या एहसास हो सकता है। मन को पवित्र रखना भी जरूरी रहेगा। क्योंकि मन में स्वार्थ की भावनाएं भी बीच-बीच में उठ सकती हैं। वाहन इत्यादि सावधानी से चलाना है। संभव हो तो इस अवधि में वाहन इत्यादि की खरीदारी से भी बचें। यदि आपको पहले से कोई हृदय से संबंधित परेशानियां रही हैं तो उस मामले में भी जागरूक रहने की आवश्यकता रहेगी।
वहीं 3 जून 2027 से लेकर 20 अक्टूबर के बीच शनि ग्रह का गोचर मेष राशि में अर्थात आपके पंचम भाव में रहने वाला है। सामान्य तौर पर पंचम भाव में शनि के गोचर को अच्छा नहीं कहा गया है लेकिन तुलना करें तो पिछले गोचर अर्थात चतुर्थ भाव के गोचर की तुलना में यहां पर परिणाम बेहतर रहेंगे। हालांकि वाणी इत्यादि पर संयम रखने की आवश्यकता तब भी रहेगी। आर्थिक और पारिवारिक मामलों में सावधानी पूर्वक निर्वाह करने की आवश्यकता तब भी रहेगी लेकिन परिणाम तुलनात्मक रूप से बेहतर होने के कारण आप राहत की सांस ले सकेंगे।
यात्राओं में कुछ कठिनाइयां या परेशानियां देखने को मिल सकती हैं लेकिन अब यात्राएं तुलनात्मक रूप से फायदेमंद रह सकती हैं। भाई, बंधु और पड़ोसियों से चल रहे विवाद में कुछ राहत देखने को मिल सकती है। साथ में बैठकर मित्रवत बात करने की स्थिति में समस्याओं का निदान भी खोजा जा सकता है। अर्थात यह गोचर पिछले गोचर की तुलना में बेहतर तो है लेकिन सब कुछ शांत नहीं होगा। सब कुछ शांत और अनुकूल करने के लिए प्रैक्टिकली बड़े लेवल की कोशिश में करनी पड़ेगी। अनुकूल बात यह रहेगी कि उन कोशिशों में आपको कामयाबी मिल सकेगी।
उपाय: कौए या फिर भैंस को दूध और चावल खिलाना शुभ रहेगा। संभव हो तो प्रत्येक महीने नहीं तो कम से कम प्रत्येक चौथे महीने रुद्राभिषेक करना या करवाना शुभ रहेगा।
साल की शुरुआत से लेकर 3 जून 2027 तक तथा 20 अक्टूबर 2027 शनि ग्रह का गोचर आपके तीसरे भाव में रहेगा। क्योंकि तीसरे भाव में शनि के गोचर को बहुत अच्छे परिणाम देने वाला माना जाता है। इसलिए इस अवधि में आपको सामान्य तौर पर काफी अच्छे परिणाम मिल सकते हैं। शनि का यह गोचर स्वास्थ्य लाभ देने वाला माना गया है। ऐसे में जिन लोगों के स्वास्थ्य में कमजोरी है, उसके ठीक होने की संभावनाएं मजबूत बनी रहेंगी। मित्र, भाई और पड़ोसियों के साथ संबंधों में भी अनुकूलता देखने को मिलेगी। व्यापार व्यवसाय से जुड़े हुए लोग अच्छा लाभ कमा सकेंगे। आप अपने प्रतिस्पर्धियों से बेहतर करते हुए देखे जा सकेंगे।
आपका आत्मविश्वास काफी अच्छा रहेगा। अच्छे समाचार सुनने को मिल सकेंगे। भाग्य का बेहतर सपोर्ट मिलेगा। शासन प्रशासन से जुड़े हुए मामलों में भी अच्छी अनुकूलता देखने को मिल सकेगी।
वहीं 3 जून 2027 से लेकर 20 अक्टूबर के बीच शनि ग्रह का गोचर मेष राशि में अर्थात आपके चौथे भाव में रहने वाला है। शनि की यह स्थिति अनुकूल नहीं मानी गई है। चंद्र कुंडली के अनुसार चौथे भाव में शनि के गोचर को शनि की ढैया कहा जाता है, जिसे सामान्य तौर पर अच्छा नहीं माना जाता बल्कि प्रतिकूल परिणाम देने वाला कहा गया है। ऊपर से आपकी लग्न या राशि के स्वामी, साथ ही साथ धन और परिवार के स्थान के स्वामी शनि ग्रह नीच अवस्था में होकर प्रॉपर्टी, घर और मन मस्तिष्क के स्थान पर रहने वाले हैं। तो ऐसी स्थिति में आपके स्वास्थ्य में कमजोरी देखने को मिल सकती है।
घर परिवार के लोगों के साथ सामंजस्य से बिठाने में परेशानियां देखने को मिल सकती हैं। आर्थिक मामलों में भी कुछ परेशानियां देखने को मिल सकती हैं। आप तनाव में रह सकते हैं। घर गृहस्थी को लेकर भी कुछ चिंताएं रह सकती हैं। इस अवधि में आपके स्वभाव और बर्ताव में भी परिवर्तन देखने को मिल सकता है। कुल मिलाकर शनि का यह गोचर इस अवधि में अनुकूल परिणाम देने में असमर्थ रह सकता है। बल्कि कई बार शनि प्रतिकूल परिणाम भी दे सकता है। अतः इस अवधि में बहुत ही सावधानी पूर्वक निर्वाह करने की आवश्यकता रहने वाली है।
उपाय: संभव हो तो प्रत्येक महीने, नहीं तो कम से कम प्रत्येक तीसरे महीने; रुद्राभिषेक करें या फिर करवाएं तथा नियमित रूप से शिवजी का पूजन अर्चन करते रहें।
साल की शुरुआत से लेकर 3 जून 2027 तक तथा 20 अक्टूबर 2027 शनि ग्रह का गोचर आपके दूसरे भाव में रहेगा। दूसरे भाव में शनि के गोचर को अच्छे परिणाम देने वाला नहीं कहा गया है। यह भी साढ़ेसाती का ही एक चरण होता है, जिसे सामान्य तौर पर प्रतिकूल परिणाम देने वाला माना गया है। हालांकि यह साढ़ेसाती की विदाई का समय होता है। ऐसे में कुछ मामलों में शनि के परिणाम अपनी नकारात्मकता समेटने लग जाते हैं। अर्थात शनि जनित समस्याएं कम होने लग जाती हैं लेकिन छोटी-मोटी मात्रा में मौजूद रहती हैं। ऐसी स्थिति में घर परिवार में अशांति या कलह देखने को मिल सकती है।
आर्थिक मामलों में भी उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है। मुख, नेत्र या फिर दाँत आदि से संबंधित कुछ परेशानियां जिन लोगों को पहले से रही हैं, उनकी समस्याएं बढ़ सकती हैं। घर परिवार से दूर रहने की स्थितियां निर्मित हो सकती हैं। कुल मिलाकर इस गोचर को या इस टाइम अवधि को अच्छे परिणाम देने वाला नहीं कहा गया है।
वहीं 3 जून 2027 से लेकर 20 अक्टूबर के बीच शनि ग्रह का गोचर मेष राशि में अर्थात आपके तीसरे भाव में रहने वाला है। वैसे तो सामान्य तौर पर तीसरे भाव में शनि के गोचर को अच्छे परिणाम देने वाला माना जाता है लेकिन शनि ग्रह नीच अवस्था में रहेंगे, ऐसी स्थिति में परिणाम पूरी तरह से अनुकूल रहें इस बात में संदेह रहेगा अथवा ऐसा भी हो सकता है कि अनुकूल परिणाम प्राप्त करने के लिए आपको संघर्ष भी करना पड़े लेकिन अनुकूल बात यह रहेगी कि अंततः परिणाम आपके फेवर में रहेंगे। क्योंकि तीसरे भाव में शनि के गोचर को आरोग्यता देने वाला कहा गया है। इसलिए स्वास्थ्य में तुलनात्मक रूप से बेहतरी रहेगी लेकिन पूरी तरह से ठीक होने में संदेह इसलिए रहेगा क्योंकि आपकी लग्न या राशि के स्वामी शनि नीच अवस्था में रहेंगे।
हालांकि व्यापार व्यवसाय आज से जुड़े हुए मामलों में सावधानी पूर्वक निर्वाह करने की स्थिति में लाभ कमाया जा सकेगा। भाई बंधु, मित्रों और पड़ोसियों के साथ सामंजस्य बिठाने की कोशिश करने की स्थिति में सामंजस्य भी बनाया जा सकेगा। सरकार के साथ तालमेल बिठाकर काम करने की कोशिश करनी होगी, तब जाकर सरकारी समस्याओं से भी छुटकारा मिल सकेगा। कहने का तात्पर्य यह है कि इस गोचर की अवधि में शनि के परिणाम अच्छे तभी हो सकेंगे जब आप प्रैक्टिकली कोशिश, ईमानदारी के साथ करेंगे।
उपाय: नियमित रूप से मंदिर जाना और माथे पर नियमित रूप से दूध का तिलक लगाना शुभ रहेगा।
साल की शुरुआत से लेकर 3 जून 2027 तक तथा 20 अक्टूबर 2027 शनि ग्रह का गोचर आपके पहले भाव में रहेगा। शनि की इस स्थिति को अर्थात इस गोचर को सामान्य तौर पर अच्छा नहीं माना गया है। यह साढ़ेसाती की मध्य स्थित होती है, जिसे सामान्य तौर पर अशुभ फल देने वाला माना गया है। गोचर शास्त्र के अनुसार इस अवधि में स्वास्थ्य से संबंधित परेशानियां देखने को मिलती हैं। इस अवधि में आपको भी अपने स्वास्थ्य का ख्याल रखना जरूरी रहेगा। साथ ही साथ प्रयास यह भी होना चाहिए कि घर परिवार, भाई बंधु आदि से आत्मीय संबंध बना रहे।
भले ही शरीर से कहीं और रहें लेकिन मन से एक दूसरे के प्रति प्रेम बना रहना चाहिए, क्योंकि यह गोचर घर से दूर ले जाने का काम भी करता है। आर्थिक मामले में सावधानी पूर्वक निर्वाह करने की जरूरत भी बनी रहेगी। कामों में बाधाएं, अरुचि, आलस्य तथा अपयश इत्यादि के योग भी बनेंगे। ऐसे में स्थितियों परिस्थितियों के अनुसार निर्वाह करना समझदारी का काम होगा।
वहीं 3 जून 2027 से लेकर 20 अक्टूबर के बीच शनि ग्रह का गोचर मेष राशि में अर्थात आपके दूसरे भाव में रहने वाला है। यह शनि की साढ़ेसाती का अंतिम चरण होता है लेकिन इस गोचर को भी अच्छा नहीं माना जाता। हालांकि सामान्य तौर पर पिछले गोचर की तुलना में शनि यहां पर कुछ राहत देता है लेकिन आपके मामले में शनि यहां पर नीच अवस्था में होता है। फलस्वरूप घर परिवार के मामले में सजगता बढ़ाने की आवश्यकता भी पड़ सकती है।
आर्थिक और पारिवारिक मामलों में बहुत ही सावधानी पूर्वक निर्वाह करने की आवश्यकता रहेगी। हालांकि यह भी एक नियम है कि जब भी लाभ भाव का स्वामी धन भाव में जाता है तो न केवल लाभ करवाता है बल्कि बचत भी करवाता है लेकिन आपके मामले में यह सूत्र भी पूरी तरह से लागू नहीं होता क्योंकि शनि की अवस्था नीच अवस्था रहती है और नीच ग्रह जहां बैठते हैं वहां के परिणाम को प्रभावित, विशेष कर कमजोर दिशा में प्रभावित करते हैं। ऐसे में शनि के इस गोचर की अवधि में आर्थिक और पारिवारिक मामलों में सावधानी पूर्वक निर्वाह करने की आवश्यकता बनी रहेगी। मुख या फिर नेत्र आदि से संबंधित कुछ परेशानियां भी देखने को मिल सकती हैं।
वाणी पर संयम रखना बहुत जरूरी रहेगा। अपने खान-पान का ख्याल रखना भी बहुत जरूरी रहेगा। क्योंकि असंयमित खानपान आपके स्वास्थ्य को बिगाड़ सकता है। यानी शनि के दोनों ही गोचर आपके लिए अनुकूल नहीं कह गए हैं। अतः इस पूरे वर्ष ही आपको अनुशासित दिनचर्या अपने की आवश्यकता रहेगी और निष्ठा पूर्वक काम करने की आवश्यकता भी रहेगी। तभी जाकर आप परिणामों पर संतुलन बना सकेंगे।
उपाय: स्वयं को शुद्ध और सात्विक रखते हुए नियमित रूप से मंदिर जाएं। जब कभी भी आसानी से बंदर मिल सकें तो उन्हें फल मिठाई आदि खाने को दें।
हम उम्मीद करते हैं कि शनि के इस गोचर फल के माध्यम से आपको अपने आने वाले समय को व्यवस्थित करने में सहयोग मिलेगा। आने वाला समय आपके जीवन में खुशहाली और तरक्की लेकर आए। आप सबको आने वाले समय की बहुत-बहुत शुभकामनाएं!
सभी ज्योतिषीय समाधानों के लिए क्लिक करें: ऑनलाइन शॉपिंग स्टोर
हम उम्मीद करते हैं कि आपको हमारा यह लेख ज़रूर पसंद आया होगा। अगर ऐसा है तो आप इसे अपने अन्य शुभचिंतकों के साथ ज़रूर साझा करें। धन्यवाद!
1. 2027 में शनि का गोचर कब होगा?
शनि 3 जून 2027 को मेष राशि में प्रवेश करेंगे और 20 अक्टूबर 2027 को वापस मीन राशि में लौट आएंगे।
2. 2027 में शनि की साढ़ेसाती किन राशियों पर रहेगी?
2027 में अलग-अलग अवधि में कुंभ, मीन, मेष और वृषभ राशि पर शनि की साढ़ेसाती का प्रभाव रहेगा।
3. क्या 2027 में शनि की साढ़ेसाती हमेशा अशुभ रहेगी?
नहीं, इसके परिणाम जन्म कुंडली में शनि की स्थिति और व्यक्ति के कर्मों के अनुसार अलग-अलग हो सकते हैं।