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लाल किताब ऋण, लाल किताब कुंडली के अनुसार

लाल किताब वर्तमान और पिछले जन्म के हमारे कर्मों को जोड़कर किसी के जीवन पर पड़ने वाले ग्रहों के प्रभाव के बारे में बताती है। लाल किताब के अनुसार, पिछले जन्म में हमारे न चुकाये हुए ऋण हमारे अलगे जन्म का भी हिस्सा बन जाते हैं। इसलिए, ग्रहों के शुभ और अशुभ प्रभाव विशेष रूप से हमारे पिछले जन्म के कर्मों पर निर्भर करते हैं। एक इंसान के रूप में हम जीवन भर कुछ ना कुछ कर्म अपने जीवन में लाभ पाने और आनंद के लिए करते रहते हैं। लेकिन कभी-कभी हमें इस बात का एहसास नहीं हो पाता है कि हमारे किये कामों का दूसरों के ऊपर क्या प्रभाव पड़ेगा। हमारे अनैतिक कर्म और किसी के द्वारा दिए गए श्राप ही हमारे जीवन के ऋण बन जाते हैं। हालांकि कुछ ऋणों का निपटारा वर्तमान जन्म में हो जाता है, लेकिन जिनका नहीं हो पाता वो हमारे अगले जन्म में साथ आता है। ये ऋण भी विभिन्न प्रकार के हो सकते हैं, जैसे कि पूर्वजों का ऋण, माता का ऋण, भाई या करीबियों का ऋण, स्त्री का ऋण, पिता का ऋण, प्रकृति का ऋण, इत्यादि। यहाँ आप अपने लाल किताब ऋण जो आपकी ही लाल किताब कुंडली पर आधारित है, उसके ज़रिये अपने पिछले जन्म के ऋणों के बारे में पता लगा सकते हैं। यहाँ हम आपको इन ऋणों, उसके कारण और उपायों के बारे में ही बताने जा रहे हैं।

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1. पूर्वजों का ऋण

लाल किताब के अनुसार, जब शुक्र, बुध, राहु किसी कुंडली के दूसरे, पांचवें, नौवें या बारहवें भाव में स्थित होते हैं तो जातक पूर्वजों के ऋण से पीड़ित हो सकता है। किसी भी व्यक्ति की कुंडली में पूर्वज ऋण होने का मतलब है कि आपके पूर्वज ने कुछ ऐसे गलत काम किये होंगें जिसकी भरपाई उन्हें तब नहीं करनी पड़ी बल्कि वो अब ऋण के रूप में आपके भाग्य के साथ जुड़ गया है। हालाँकि हर किसी की कुंडली में इस ऋण के होने के कारण अलग-अलग हो सकते हैं। पूर्वज के ऋणों से छुटकारा पाने के लिए लाल किताब में विभिन्न उपायों के बारे में भी बताया गया है।

2. स्व ऋण

लाल किताब के अनुसार, जब जन्म कुंडली के पांचवें घर में शुक्र, शनि, राहु और केतु का गोचर होता है तो जातक स्व-ऋण से पीड़ित हो सकता है। किसी भी व्यक्ति की कुंडली में स्वयं ऋण तब बनता है जब आपके पूर्वज या बुजुर्ग अपन समय काल में पारंपरिक पारिवारिक रीति रिवाजों का पालन नहीं करते हैं या भगवान या धर्म में अपनी आस्था का त्याग कर चुके होते हैं। इसके अलावा भी विभिन्न व्यक्तियों की कुंडली में इस ऋण के होने का कारण अलग हो सकता है लेकिन इसका जुड़ाव आपके पूर्वज से ही होता है। लाल किताब में स्व ऋण से छुटकारा पाने के विभिन्न उपायों के बारे में बताया गया है जिसकी मदद से आप इस ऋण से मुक्ति पा सकते हैं।

3. मातृ ऋण

लाल किताब के अनुसार, जब केतु कुंडली के चौथे घर में स्थित होता है तो ऐसे जातक माता के ऋण से पीड़ित हो सकते हैं। मातृ ऋण होने का कारण भी आपके पूर्वजों से जुड़ा हो सकता है। अमूमन मातृ ऋण किसी की कुंडली में तब होता है जब आपके पूर्वजों ने किसी की माँ की अवहेलना की हो या उसे अपने बच्चे से दूर रखा हो। इसके साथ ही मातृ ऋण होने का कारण हर जातक की कुंडली में अलग हो सकता है। मातृ ऋण से निजात पाने के लिए लाल किताब में विभिन्न उपायों के बारे में बताया गया है।

4. स्त्री ऋण

लाल किताब के अनुसार जब कुंडली के दूसरे और सातवें भाव में सूर्य, चंद्रमा और राहु की स्थिति होती है तो ऐसे जातक स्त्री ऋण से पीड़ित हो सकता है। इसके पीछे मुख्य वजह ये है कि आपके पूर्वज ने किसी स्त्री के बदसलूकी की होगी या फिर उन्हें किसी प्रकार का कष्ट पहुँचाया होगा। स्त्री ऋण को लाल किताब में सबसे बड़ा ऋण माना गया है। इससे छुटकारा पाने के लिए विभिन्न उपायों के बारे में भी बताया गया है जिन्हें अपना कर आप स्त्री ऋण से मुक्त हो सकते हैं।

5. भाई या रिश्तेदारों का ऋण

लाल किताब के अनुसार जब बुध और केतु किसी की कुंडली के पहले या आठवें घर में स्थित होते हैं तो ऐसी जातक रिश्तेदार या भाई के कर्ज से पीड़ित हो सकते हैं। वैसे तो इस तरह के ऋण के होने के कारण अलग हो सकते हैं लेकिन मुख्य तौर पर इस ऋण का कुंडली में होने के पीछे का कारण यह है कि आपके पूर्वजों ने किसी की फसल या घर में आग लगा दी हो, किसी को जहर दे दिया हो या फिर गर्भावस्था के दौरान किसी की भैंस को मार दिया हो। लाल किताब में इस ऋण से मुक्ति के लिए भी विशेष उपाय बताये गए हैं।

6. बेटी ऋण

लाल किताब के अनुसार, जब चंद्रमा किसी की कुंडली के तीसरे या छठे भाव में स्थित होता है तो जातक बेटी के कर्ज से पीड़ित हो सकता है। आपकी कुंडली में इस ऋण के होने का कारण पूर्वजों या बड़ों द्वारा किसी लड़की या किसी की बहन की हत्या या उसे प्रताड़ित करना हो सकता है। अगर आपकी कुंडली में ये ऋण है तो आप लाल किताब में बताये गए उपाय का इस्तेमाल कर इस ऋण से मुक्त हो सकते हैं।

7. विपक्षी ऋण

लाल किताब के अनुसार, जब सूर्य, चंद्रमा और मंगल दसवें और ग्यारहवें घरों में स्थित होते हैं, तो ऐसे जातकों की कुंडली में विपक्षी ऋण के योग उत्पन्न हो सकते हैं। कुंडली में इस योग के होने का कारण पूर्वजों या बुजुर्गों द्वारा किसी को धोखा देना, किसी के घर पर कब्ज़ा कर लेना या किसी के साथ ठगी आदि करना हो सकता है। विपक्षी ऋण से मुक्त होने के लिए आप लाल किताब में बताये गए उपायों का पालन कर सकते हैं।

8. अजन्मा ऋण

लाल किताब के अनुसार जब कुंडली के बारहवें भाव में सूर्य, शुक्र, मंगल की स्थिति बनती है तो जातक अजन्मा ऋण से ग्रसित हो सकता है। आपकी कुंडली में इस ऋण के होने का कारण आपके पूर्वज या किसी बड़े द्वारा ससुराल वालों के साथ विश्वासघात या परिवार का विनाश होना हो सकता है। लाल किताब में बताये उपायों का पालन कर इस ऋण से आप मुक्त हो सकते हैं।

9. प्रकृति ऋण

लाल किताब के अनुसार, जब चंद्रमा और मंगल किसी की कुंडली के छठे घर में होते हैं तो ऐसे जातक प्रकृति के ऋण से पीड़ित हो सकता है। किसी की कुंडली में प्रकृति ऋण का योग बनने का कारण पूर्वजों द्वारा किसी के साथ गलत व्यवहार करना है। हालाँकि इसके अलावा भी कुछ ऐसे काम हो सकते हैं जो आपके पूर्वजों द्वारा करने की वजह से आपकी कुंडली में प्रकृति ऋण का कारण बन सकते हैं। इसके समाधान के लिए आप लाल किताब में बताये गए उपायों का पालन कर सकते हैं।

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