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बृहस्पति ग्रह का 12 भावों में फल लाल किताब के अनुसार

पढ़ें लाल किताब के अनुसार बृहस्पति ग्रह से संबंधित प्रभाव और उपाय। ज्योतिष में बृहस्पति को एक शुभ ग्रह माना गया है। लाल किताब जो कि पूरी तरह से उपाय आधारित ज्योतिष पद्धति है। इसमें बृहस्पति ग्रह के विभिन्न भावों में फल और उनके प्रभाव के बारे में विस्तार से व्याख्या की गई है।

लाल किताब में बृहस्पति ग्रह

लाल किताब के अनुसार बृहस्पति ग्रह का 12 भावों में प्रभाव हिन्दू ज्योतिष में बृहस्पति को देव गुरु कहा जाता है। यह धनु और मीन राशि का स्वामी है और कर्क राशि में उच्च और मकर राशि में नीच का होता है। सूर्य, मंगल और चंद्रमा बृहस्पति के मित्र हैं। वहीं शुक्र, बुध शत्रु और शनि व राहु बृहस्पति के साथ सम-भाव रखते हैं। लाल किताब में बृहस्पति को एक महत्वपूर्ण ग्रह माना गया है। पीपल, पीला रंग, सोना, हल्दी, चने की दाल, पीले फूल, केसर, गुरु, पिता, वृद्ध पुरोहित, विद्या और पूजा-पाठ यह सब बृहस्पति के प्रतीक माने गये हैं।

लाल किताब के अनुसार मित्र ग्रहों के साथ बृहस्पति

चंद्रमा का साथ मिलने पर बृहस्पति की शक्ति बढ़ जाती है। वहीं मंगल का साथ मिलने पर बृहस्पति की शक्ति दोगुना बढ़ जाती है। सूर्य ग्रह के साथ से बृहस्पति की मान-प्रतिष्ठा बढ़ती है।

शत्रु ग्रहों के साथ बृहस्पति

बृहस्पति के तीन मित्र ग्रह होने के साथ-साथ तीन शत्रु ग्रह भी हैं। ये ग्रह सदैव बृहस्पति को हानि पहुंचाने के लिए अवसर तलाशते हैं। बृहस्पति का पहला शत्रु बुध है, दूसरा शुक्र और तीसरा शत्रु राहु है।

बृहस्पति ग्रह के गुण और अवगुण

संसार के हर प्राणी और वस्तु में कोई गुण और अवगुण दोनों होते हैं। ठीक इसी प्रकार आकाश में विचरण कर रहे ग्रहों में भी गुण और अवगुण दोनों होते हैं। बृहस्पति ग्रह मान, प्रतिष्ठा और उत्पत्ति का कारक है लेकिन निर्बल होने पर बृहस्पति के यह सभी गुण पलभर में खत्म हो जाते हैं। जातक अपने कर्मों के द्वारा अपनी जन्म कुंडली के प्रबल और उत्तम बृहस्पति को, जो चतुर्थ भाव में अच्छा फल देने वाला होता है, उसे निर्बल कर लेता है। पिता, बाबा, दादा, ब्राह्मण और बुजुर्गों को निरादर करने से उत्तम बृहस्पति निष्फल हो जाता है।

लाल किताब में बृहस्पति के बुरे प्रभाव के लक्षण

लाल किताब के अनुसार जब कुंडली में बृहस्पति पीड़ित होता है तो जातक पर निम्न प्रभाव देखने को मिलते हैं-

  • सिर के बीचों बीच से बाल उड़ने लगते हैं
  • शिक्षा में व्यवधान उत्पन्न होने लगता है
  • नेत्र में पीड़ा होने लगती है
  • सपने में सर्प का दिखना
  • व्यक्ति के बारे में बेकार की अफवाहें उड़ना
  • गले में दर्द और फेफड़े की बीमारी होना

लाल किताब के अनुसार बृहस्पति की शांति के लिए किये जाने वाले उपाय

जब जन्म कुंडली में बृहस्पति की स्थिति कमजोर हो तो, लाल किताब से संबंधित निम्न उपाय अवश्य करना चाहिए।

  • हल्दी की गांठ पीले रंग के धागे में बांधकर दायीं भुजा पर बांधना चाहिए।
  • 27 गुरुवार तक केसर का तिलक लगाना और केसर की पुड़िया पीले रंग के कपड़े या कागज में अपने पास रखना चाहिए।
  • पीले रंग के वस्त्र पहनना और घर में पीले रंग के पर्दे लगाना शुभ होता है।
  • घर में पीले सूरजमुखी का पौधा लगाना चाहिए।
  • सोने की चेन और बृहस्पति यंत्र धारण करना चाहिए।

बृहस्पति ग्रह से संबंधित अन्य ज्योतिषीय उपाय

बृहस्पति ग्रह के अशुभ प्रभावों को दूर करने और शुभ फल की प्राप्ति के लिए लाल किताब के अलावा अन्य ज्योतिषीय उपाय भी किये जाते हैं।

  • व्यक्ति को माता-पिता, गुरुजन और अन्य पूज्यनीय व्यक्तियों के प्रति आदर और सम्मान का भाव रखना चाहिए।
  • किसी मंदिर या धार्मिक स्थल पर जाकर निःशुल्क सेवा करनी चाहिए।
  • गुरुवार के दिन मंदिर में केले के पेड़ के नीचे घी का दीपक जलाना चाहिए।
  • गुरुवार के दिन आटे की लोई में चने की दाल, गुड़ और हल्दी डालकर गाय को खिलानी चाहिए।
  • चूंकि गुरु आध्यात्मिक ज्ञान का कारक कहा जाता है इसलिए बुद्धिजीवी व्यक्ति और गुरुजन का सम्मान करें।
  • गुरुवार के दिन ‘ॐ बृं बृहस्पतये नमः!’ मंत्र का जाप करें।
  • गुरुवार को बृहस्पति के वैदिक मंत्र का जाप करने से मोटापा और पेट से संबंधित बीमारियां दूर होती हैं।
  • गुरुवार को बृहस्पति देव की पूजा में गंध, अक्षत, पीले फूल, पीले पकवान और पीले वस्त्र का दान करें।
  • बृहस्पति ग्रह से संबंधित यह सभी टोटके गुरुवार के दिन बृहस्पति के नक्षत्र (पुनर्वसु, विशाखा, पूर्वा भाद्रपद) और गुरु की होरा में करना चाहिए।

बृहस्पति से संबंधित व्यवसाय और पेशा

बृहस्पति को धर्म, दर्शन और ज्ञान का कारक माना जाता है। न्यायाधीश, मजिस्ट्रेट, वकील, बैंक मैनेजर, कंपनी का मैनेजिंग डायरेक्टर, ज्योतिषी और शिक्षक आदि बृहस्पति ग्रह के प्रतीक हैं।

शेयर मार्केट, किताबों का बिजनेस, शिक्षा और धर्म संबंधी पुस्तकें, वकालत और शिक्षा संस्थाओं का संचालन आदि बृहस्पति के प्रतीक रूप व्यवसाय हैं। फायनेंस कंपनी और अर्थ मंत्रालय भी बृहस्पति के प्रतीक कहे जाते हैं।

बृहस्पति से संबंधित रोग

गुरु के बुरे प्रभाव से व्यक्ति के शरीर में कफ और चर्बी की वृद्धि होती है। डायबिटीज, हर्निया, कमजोर याददाशत, पीलिया, पेट, सूजन, बेहोशी, कान और फेफड़ों आदि से संबंधित रोग होते हैं।

बृहस्पति ग्रह से संबंधित अन्य उपाय

बृहस्पति ग्रह की शांति और उससे शुभ फल प्राप्त करने के लिए जिन वस्तुओं का दान करना चाहिए। उनमें चीनी, केला, पीला कपड़ा, केसर, नमक, मिठाई, हल्दी, पीले फूल और पीला भोजन उत्तम माना गया है। इस ग्रह की शांति के लिए बृहस्पति से संबंधित रत्न का दान करना भी श्रेष्ठ होता है। दान करते समय आपको ध्यान रहे कि दिन बृहस्पतिवार हो और सुबह का समय हो। किसी ब्राह्मण, गुरू अथवा पुरोहित को दान देना विशेष फलदायक होता है। बृहस्पतिवार के दिन व्रत भी रखना चाहिए। जिन लोगों का बृहस्पति कमजोर हो उन लोगों को केला और पीले रंग की मिठाईयां गरीबों, पक्षियों विशेषकर कौओं को देना चाहिए। निर्धन और ब्राह्मणों को दही चावल खिलाना चाहिए। पीपल के वृक्ष की जड़ में जल अर्पित करना चाहिए। गुरू, पुरोहित और शिक्षकों में बृहस्पति का निवास होता है अत: इनकी सेवा से भी बृहस्पति के दुष्प्रभाव में कमी आती है।

बृहस्पति को अन्य सभी ग्रहों का गुरु और ब्रह्मा जी का प्रतीक माना गया है। बृहस्पति की कृपा से जीवन में ज्ञान, धर्म, संतान और ऐश्वर्य की प्राप्ति होती है, इसलिए कुंडली में बृहस्पति की स्थिति प्रबल होने बहुत आवश्यक है।

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