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ग्रहण 2022 : सूर्य ग्रहण 2022 और चंद्र ग्रहण 2022 तिथियां

ग्रहण 2022 (Grahan 2022) के इस पेज के माध्यम से हम एस्ट्रोसेज के सभी पाठकों को नए साल वर्ष 2022 में होने वाले सभी ग्रहण की संपूर्ण जानकारी प्रदान कर रहे हैं। यहां आपको सूर्य ग्रहण 2022 (Surya Grahan 2022) और चंद्र ग्रहण 2022 (Chandra Grahan 2022) से संबंधित सभी छोटी-बड़ी और महत्वपूर्ण बातें प्रदान की जा रही है।

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ग्रहण 2022

सबसे पहले बात करते हैं कि, आखिर यह ग्रहण होता क्या है? तो, ग्रहण को एक ऐसी खगोलीय स्थिति माना जाता है जिसमें कोई खगोलीय पिंड जैसे कोई ग्रह या फिर कोई उपग्रह जैसे सूर्य या पृथ्वी या फिर किसी अन्य खगोलीय पिंड के बीच में आ जाता है। ऐसी स्थिति में प्रकाश कुछ समय के लिए आना रुक जाता है और इसी स्थिति को ग्रहण कहा जाता है।

तो आगे बढ़ते हैं और इस लेख के माध्यम से जानते हैं कि वर्ष 2022 में ग्रहण (Grahan 2022) किन-किन तारीख पर लग रहा है। साथ ही ग्रहण से जुड़ी अन्य महत्वपूर्ण जानकारियां भी हासिल करते हैं। इसके साथ ही इस विशेष अंक में न केवल हम 2022 में होने वाले ग्रहण की तारीख, समय, अवधि और यह ग्रहण कहां नजर आएंगे इस पर बातचीत करेंगे बल्कि ग्रहण का धार्मिक और ज्योतिषी पहलू क्या होता है यह भी हम जानने की कोशिश करेंगे। इसके अलावा इस आर्टिकल में हम उन उपायों के बारे में भी बात करेंगे जिन्हें ग्रहण के दौरान अपनाने से आपके जीवन में ग्रहण के दुष्प्रभाव तो कम होंगे ही साथ ही जीवन में सुख समृद्धि भी बनी रहेगी।

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साल 2022 में घटित होने वाले सभी ग्रहण

वर्ष 2022 में लगने वाले सभी ग्रहण की बात करें तो इस साल 2 सूर्य ग्रहण (Surya Grahan 2022) और 2 चंद्र ग्रहण लगेंगे। दृश्यता की बात करें तो इनमें से कुछ ग्रहण तो भारत में नजर आएंगे लेकिन वहीं कुछ ग्रहण भारत में नहीं देखे जा सकेंगे। ऐसे में स्वाभाविक है दृश्यता के अनुसार ही इनका सूतक काल भी निर्धारित होगा। जानकारी के लिए बता दें, जब ग्रहण भारत में पूरी तरह से नजर आएगा तब सूतक काल मान्य होगा, वहीं जिस ग्रहण की दृश्यता भारत में नहीं होगी उसका सूतक काल भी भारत में प्रभावी नहीं होगा।

अब जानते हैं सूतक काल क्या होता है? सूर्य ग्रहण किस स्थिति को कहते हैं? और चंद्र ग्रहण किस स्थिति को कहते हैं? और ग्रहण के प्रकार कितने होते हैं?

सूर्य ग्रहण 2022 (Surya Grahan 2022): कब लगता है सूर्य ग्रहण और सूर्य ग्रहण के प्रकार

सूर्य ग्रहण को एक खगोलीय घटना माना जाता है। हालांकि धार्मिक दृष्टि से बात करें तो ग्रहण को शुभ नहीं माना जाता। सूर्य ग्रहण की बात करें तो यह उस स्थिति को कहते हैं जब चंद्रमा सूर्य को पूरी तरह से ढक लेता है। इस स्थिति में सूर्य की किरणें धरती तक नहीं पहुंच पाती है और इसे सूर्य ग्रहण या पूर्ण सूर्यग्रहण कहा जाता है। वहीं जब चंद्रमा सूर्य को केवल आंशिक रूप से ढकता है यानी कि, सूर्य की कुछ रोशनी तो धरती तक आती है ऐसे स्थिति को आंशिक सूर्यग्रहण कहते हैं और, जब चंद्रमा सूर्य के मध्य भाग को ढकता है इस स्थिति में सूर्य एक रिंग (अंगूठी) की तरह नजर आने लगता है तब इस स्थिति को वलयाकार सूर्यग्रहण कहते हैं।

चंद्र ग्रहण 2022 (Chandra Grahan 2022): कब लगता है चंद्र ग्रहण और चंद्र ग्रहण के प्रकार

सूर्य ग्रहण की तरह चंद्रग्रहण भी एक खगोलीय घटना है। इस स्थिति में सूर्य और चंद्रमा के बीच पृथ्वी आ जाती है। ऐसी स्थिति में चंद्रमा पर सूर्य का प्रकाश बंद हो जाता है और इसे चंद्रग्रहण कहते हैं। बात करें चंद्र ग्रहण के प्रकार की तो सूर्य ग्रहण की तरह चंद्रग्रहण भी मुख्य रूप से तीन प्रकार के होते हैं। पूर्ण चंद्र ग्रहण, इस स्थिति में सूर्य की परिक्रमा करते हुए पृथ्वी ठीक उसके सामने आ जाती है और उसी समय पृथ्वी के आगे चंद्रमा आ जाता है। ऐसी स्थिति में पृथ्वी सूर्य को पूरी तरह से ढक लेती है जिस से चंद्रमा तक सूर्य का प्रकाश नहीं पहुंच पाता है और इसे पूर्ण चंद्रग्रहण कहते हैं। दूसरी स्थिति में जब पृथ्वी चंद्रमा को आंशिक रूप से ढक लेती है तो इसे आंशिक चंद्रग्रहण कहते हैं। इसके अलावा जब चंद्रमा पृथ्वी की परिक्रमा करते हुए उसके पैनंब्रा से होकर गुजरता है तब इस स्थिति में चंद्रमा पर सूर्य का प्रकाश कटा हुआ पहुँचता है। इस स्थिति में चंद्रमा की सतह धुंधली नजर आती है जिसे सामान्य भाषा में उपछाया या पेनुम्ब्रा चंद्र ग्रहण कहते हैं। असल में इसे ग्रहण नहीं कहा जाता है। ऐसे में इसका सूतक काल मान्य नहीं होता है।

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अब विस्तार से जानते हैं साल में पड़ने वाले चंद्र और सूर्य ग्रहण की समय अवधि, तिथि, और ये ग्रहण कहां नजर आएगा। इस बात की जानकारी विस्तार से:

  • सूर्य ग्रहण 2022 (Surya Grahan 2022)

वर्ष 2022 में लगने वाले सूर्य ग्रहण (Surya Grahan 2022) की बात करें तो इस साल दो सूर्य ग्रहण लगने वाले हैं। पहला सूर्य ग्रहण 30 अप्रैल को लगेगा। यह आंशिक सूर्य ग्रहण होने वाला है और दूसरा सूर्य ग्रहण 25 अक्टूबर को लगेगा। यह भी आंशिक सूर्यग्रहण ही कहलाएगा।

पहला सूर्य ग्रहण 2022
तारीख़ सूर्य ग्रहण प्रारंभ सूर्य ग्रहण समाप्त दृश्य क्षेत्र
30 अप्रैल 00:15:19 . से 04:07:56 तक दक्षिण अमेरिका का दक्षिण-पश्चिमी भाग, प्रशांत महासागर, अटलांटिक और अंटार्कटिका

सूचना: उपरोक्त तालिका में दिया गया समय भारतीय समयानुसार है। ये सूर्य ग्रहण भारत में नहीं दिखाई देगा। इसलिए भारत में इस सूर्य ग्रहण का धार्मिक प्रभाव और सूतक मान्य नहीं होगा।

साल 2022 का पहला सूर्य ग्रहण 30 अप्रैल 2022 को लगेगा और यह एक आंशिक सूर्यग्रहण होगा। आंशिक सूर्यग्रहण उस स्थिति को कहते हैं जब चंद्रमा सूर्य और पृथ्वी के बीच कुछ इस तरह से आ जाता है कि सूर्य का कुछ हिस्सा पृथ्वी से नजर नहीं आता है। यानी कि चंद्रमा सूर्य के केवल कुछ हिस्से को अपनी छाया में कैद करने में सक्षम होता है। इस स्थिति में सूर्य का कुछ भाग ग्रहण से प्रभावित होता है और यही भाग ग्रहण कहलाता है। पृथ्वी के उस विशेष भाग में लगने वाले इस ग्रहण को आंशिक ग्रहण या आंशिक सूर्यग्रहण कहा जाता है। हिंदू पंचांग के अनुसार इस ग्रहण की समय अवधि के बारे में बात करें तो 1 मई रविवार को यह ग्रहण सुबह 00:15:19 बजे से 04:07:56 बजे तक रहेगा। इसके अलावा साल का यह पहला सूर्यग्रहण दक्षिण अमेरिका के दक्षिणी पश्चिमी हिस्से, प्रशांत महासागर, अटलांटिक और अंटार्कटिका में नजर आएगा। क्योंकि भारत में इस सूर्य ग्रहण की दृश्यता शून्य होगी इसलिए यहां पर इसका सूतक काल प्रभावी नहीं माना जाएगा।

सूर्य ग्रहण 2022 के बारे में यहां विस्तार से जानें

दूसरा सूर्य ग्रहण
तारीख़ सूर्य ग्रहण प्रारंभ सूर्य ग्रहण समाप्त दृश्य क्षेत्र
25 अक्टूबर 16:29:10 . से 17:42:01 . तक यूरोप, अफ्रीका महाद्वीप का उत्तरपूर्वी भाग, एशिया का दक्षिण-पश्चिमी भाग और अटलांटिक

सूचना: उपरोक्त तालिका में दिया गया समय भारतीय समयानुसार है। यह सूर्य ग्रहण भारत में कुछ जगहों पर देखा जा सकेगा इसलिए भारत में इस सूर्य ग्रहण का धार्मिक प्रभाव और सूतक मान्य होगा।

साल 2022 का दूसरा और आखिरी सूर्य ग्रहण आंशिक सूर्य ग्रहण होगा जो 25 अक्टूबर को लगेगा। आंशिक सूर्य ग्रहण की स्थिति तब बनती है जब चंद्रमा सूर्य और पृथ्वी के बीच कुछ इस तरह से आ जाता है कि सूर्य का कुछ हिस्सा पृथ्वी पर नजर नहीं आता है। हिंदू पंचांग के अनुसार इस ग्रहण की बात करें तो यह ग्रहण 25 अक्टूबर मंगलवार शाम 16:29:10 बजे से 17:42:01 बजे तक रहेगा, जो यूरोप, अफ्रीका महाद्वीप के उत्तर-पूर्वी भाग, एशिया के दक्षिण-पश्चिमी भाग और अटलांटिक में ही दिखाई देगा। इस सूर्य ग्रहण की दृश्यता भारत में बनी रहेगी, जिससे यहां सूतक काल भी प्रभावी रहेगा।

  • चंद्र ग्रहण 2022 (Chandra Grahan 2022)

वर्ष 2022 में चंद्रग्रहण की यह घटना दो बार घटित होगी और इस साल लगने वाले दोनों ही चंद्रग्रहण पूर्ण चंद्रग्रहण होने वाले हैं।

पहला चंद्र ग्रहण 2022
तारीख़ चंद्र ग्रहण प्रारंभ चंद्र ग्रहण समाप्त ग्रहण के प्रकार दृश्य क्षेत्र
15-16 मई 08:59:03 . से 10:23:55 . तक पूर्ण चंद्र ग्रहण दक्षिण-पश्चिमी यूरोप, दक्षिण-पश्चिमी एशिया, अफ्रीका, अधिकांश उत्तरी अमेरिका, दक्षिण अमेरिका, प्रशांत महासागर, हिंद महासागर, अटलांटिक और अंटार्कटिका

साल का पहला पूर्ण चंद्रग्रहण 16 मई 2022 को लगेगा। ग्रहण के समय की बात करें तो भारतीय समय के अनुसार यह सोमवार को सुबह 08:59 बजे से 10:23 बजे तक रहेगा। साल का पहला चंद्र ग्रहण दक्षिणी-पश्चिमी यूरोप, दक्षिणी-पश्चिमी एशिया, अफ्रीका, उत्तरी अमेरिका के अधिकांश हिस्सों, दक्षिण अमेरिका, प्रशांत महासागर, हिंद महासागर, अटलांटिक और अंटार्कटिका में भी दिखाई देगा। चूंकि भारत में इस चंद्र ग्रहण की दृश्यता शून्य होगी, इसलिए यहां इसका सूतक काल प्रभावी नहीं होगा।

दूसरा चंद्र ग्रहण 2022
तारीख़ चंद्र ग्रहण प्रारंभ चंद्र ग्रहण समाप्त ग्रहण के प्रकार दृश्य क्षेत्र
8 नवंबर 17:28 . से 19:26 . तक पूर्ण चंद्र ग्रहण उत्तर-पूर्वी यूरोप, एशिया, ऑस्ट्रेलिया, उत्तरी अमेरिका, अधिकांश दक्षिण अमेरिका, प्रशांत महासागर, अटलांटिक, हिंद महासागर, आर्कटिक और अंटार्कटिका

सूचना: उपरोक्त तालिका में दिया गया समय भारतीय समयानुसार है। इसी वजह से यह चंद्र ग्रहण भारत में कुछ जगहों पर देखा जा सकेगा। इसलिए भारत में इस ग्रहण का धार्मिक प्रभाव और सूतक मान्य होगा।

साल 2022 का दूसरा चंद्र ग्रहण 8 नवंबर 2022 मंगलवार को लगेगा जो दोपहर 17:28 बजे से 19:26 बजे तक रहेगा। इस चंद्र ग्रहण के दृश्य क्षेत्र उत्तर-पूर्वी यूरोप, एशिया, ऑस्ट्रेलिया, उत्तरी अमेरिका, अधिकांश दक्षिण अमेरिका, प्रशांत महासागर, अटलांटिक, हिंद महासागर, आर्कटिक और अंटार्कटिका होंगे। यह चंद्र ग्रहण भारत में दिखेगा, इसलिए इसका सूतक यहां भी प्रभावी रहेगा।

चंद्र ग्रहण 2022 के बारे में यहां विस्तार से जानें (LINK)

सूतक काल: क्या होता है ग्रहण से पहले लगने वाला सूतक?

ग्रहण का जिक्र होता है तो सूतक काल की बात अवश्य की जाती है। ऐसे में सवाल होता है कि, आखिर सूतक काल किसे कहते हैं? जानकारी के लिए बता दें कि ग्रहण लगने से पहले की समय अवधि को अशुभ माना जाता है और इसे ही सूतक कहते हैं। इस समय अवधि में किसी भी तरह का कोई भी शुभ काम या मांगलिक कार्य नहीं किया जाना चाहिए। कहते हैं यदि इस सूतक काल के दौरान व्यक्ति कोई भी शुभ कार्य करता है, या नया काम शुरू करता है, या मांगलिक कार्य करता है, तो उसे शुभ फल की जगह अशुभ फल की प्राप्ति होती है। यही वजह है कि सूतक काल से बचने के लिए कुछ प्रभावी उपाय बताए गए हैं जिन्हें ग्रहण के दौरान आप अपने परिवार के साथ करके ग्रहण के अशुभ प्रभाव से बच सकते हैं। अब जानते हैं कि सूतक काल की गणना कैसे की जाती है, जिससे आपको वर्ष 2022 में लगने वाले ग्रहण के सूतक काल की जानकारी प्राप्त हो सके।

ज्योतिष के अनुसार ग्रहण के सूतक काल में किसी भी तरह का हो शुभ कार्य करने की मनाही होती है। ऐसे में स्वाभाविक है कि इसके लिए इस बात की जानकारी होना बेहद आवश्यक है कि ग्रहण का सूतक कब से लग रहा है और यह कब तक प्रभावी रहेगा। ऐसे में सूतक काल की गणना के लिए सबसे पहले सूर्य ग्रहण और चंद्र ग्रहण की तिथि के साथ समय का सटीक ज्ञान होना बेहद आवश्यक है। ऐसा इसलिए क्योंकि जब सूर्य ग्रहण के सूतक काल की बात करते हैं तो ऐसे में सूर्य ग्रहण घटित होने से ठीक 12 घंटे पहले से उसका सूतक काल शुरू हो जाता है और सूतक काल ग्रहण समाप्त होने के बाद समाप्त होता है। इसी तरह जब चंद्र ग्रहण के सूतक काल की बात करते हैं तो चंद्र ग्रहण का सूतक चंद्र ग्रहण शुरू होने से ठीक 9 घंटे पहले प्रारंभ हो जाता है और चंद्र ग्रहण समाप्त होने के बाद तक समाप्त हो जाता है।

सूतक काल में क्या करें क्या ना करें

  • ग्रहण 2022 के सूतक काल के दौरान जितना मुमकिन हो कम बोलें और भगवान की भक्ति में अपना मन लगाएं।
  • भगवान का ध्यान करें, उनकी पूजा करें, इत्यादि।
  • सूतक काल के दौरान ग्रहण से संबंधित ग्रह की शांति के लिए पूजा करें, पाठ करें, और मंत्रों का जप करें।
  • सूतक काल के समय जितना मुमकिन हो योग और ध्यान करें। ऐसा करने से आपकी मानसिक शक्ति का विकास होगा और आप खुद को और अपने परिवार को ग्रहण के दुष्प्रभाव से भी बचा सकेंगे।
  • सूतक काल लगने के दौरान मुमकिन हो तो खाना नहीं बनाएं और अगर खाना बना लिया है तो उसमें तुलसी के पत्ते डालकर रख दें।
  • चंद्र ग्रहण के दौरान चंद्र मंत्रों का जप करें और सूर्यग्रहण के दौरान सूर्य मंत्रों का स-परिवार स्पष्ट उच्चारण पूर्वक जप करें।
  • इस दौरान की जाने वाली पूजा में मिट्टी के दीयों का इस्तेमाल करें।
  • जब सूतक काल समाप्त हो जाए तो घर को साफ करें, दोबारा पूजा पाठ करें, और स्नान करें।
  • ग्रहण समाप्त होने पर घर पर और पूजा स्थल पर गंगाजल छिड़कें और घर को शुद्ध करें।
  • साथ ही सूतक काल में किसी भी गर्भवती महिला को घर से बाहर बिल्कुल भी नहीं जाना चाहिए और इस दौरान विशेष सावधानियां बरतनी चाहिए। ध्यान रहे कि ग्रहण की छाया आपके गर्भ में पल रहे शिशु पर न पड़े।
  • शास्त्रों के अनुसार सूतक काल में दांतों की सफाई और बालों में कंघी नहीं करनी चाहिए। सूतक काल चल रहा हो तो सोने से बचें।

धार्मिक दृष्टि से सूतक काल में किसी भी पवित्र मूर्ति को छूना अत्यंत अशुभ माना जाता है। इस दौरान काम या क्रोध जैसे नकारात्मक विचारों को अपने मन में घर न आने दें। साथ ही इस समय अवधि के दौरान मल, मूत्र और शौच जैसे कार्य करना भी वर्जित है। साथ ही इस दौरान चाकू और कैंची जैसी नुकीली चीजों का इस्तेमाल करना भी मना है।

सूर्य ग्रहण के दौरान मंत्र जाप चंद्र ग्रहण ग्रहण के दौरान मंत्र जाप
"ॐ आदित्याय विदमहे दिवाकराय धीमहि तन्न: सूर्य: प्रचोदयात" “ॐ क्षीरपुत्राय विद्महे अमृत तत्वाय धीमहि तन्नो चन्द्रः प्रचोदयात्”

ग्रहण से जुड़ी पौराणिक कथा

ग्रहण से संबंधित हिंदू धर्म की पौराणिक कथाओं की बात करें तो, ग्रहण को राहु और केतु से जोड़कर देखा जाता है। राहु और केतु ग्रह को हिंदू धार्मिक मान्यताओं में छाया ग्रह भी कहते हैं। इससे संबंधित पौराणिक कथा के अनुसार कहा जाता है कि, समुद्र मंथन के समय देवताओं और असुरों में अमृत से भरे कलश (जो समुद्र मंथन से हासिल हुआ था वह) अपने कब्जे में करने के लिए युद्ध छिड़ गया। इस युद्ध में जीत असुरों की हुई और वह अमृत कलश को अपने साथ पाताल लोक में लेकर चले गए। ऐसे में देवताओं को इस बात का डर होने लगा कि यदि यह अमृत असुरों ने पी लिया तो उनका आतंक और बढ़ जाएगा। तब भगवान विष्णु ने मोहिनी अप्सरा का रूप धारण किया और अपने रूप से असुरों को मोहित करके उनसे वह अमृत कलश ले लिया।

इसके बाद स्वयं भगवान विष्णु ने देवताओं और असुरों को अमृत देना शुरू किया। हालांकि तभी स्वर्भानु नामक राक्षस ने भगवान विष्णु की इस चाल को समझ लिया और देवताओं की पंक्ति में आकर बैठ गया। जब उसकी बारी आई तो भगवान विष्णु ने उसे अमृत का प्याला दिया। राक्षस ने अमृत पी भी लिया। लेकिन सूर्य और चंद्रमा को इस बात की भनक लग गई कि देवताओं की पंक्ति में यह राक्षस मौजूद है। ऐसे में उन्होंने भगवान विष्णु को इस बारे में सब कुछ बता दिया। सच्चाई पता चलते ही भगवान विष्णु को बहुत क्रोध आया और उन्होंने अपने सुदर्शन चक्र से स्वर्भानु का सिर काट दिया। लेकिन क्योंकि तब तक स्वर्भानु नामक इस राक्षस में अमृत पान कर लिया था इसलिए उसकी जान बच गई। हालांकि उसका सिर धड़ से अलग हो गया था। कहा जाता है इस राक्षस के इन्हीं दोनों हिस्सों को केतु और राहु के नाम से जाना जाता है और कहा जाता है कि, इस तिरस्कार के बाद ही राहु और केतु समय-समय पर सूर्य और चंद्रमा पर ग्रहण लगा कर अपनी दुश्मनी का बदला लेते हैं।

हम उम्मीद करते हैं कि ग्रहण 2022 पर यह लेख आपके लिए उपयोगी साबित होगा। आपका आने वाला वर्ष मंगलमय और मंगलमय हो!

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