शनि मीन राशि में वक्री (27 जुलाई 2026)
शनि मीन राशि में वक्री: वर्तमान में शनि ग्रह बृहस्पति ग्रह की दूसरी राशि यानी की मीन राशि में गोचर कर रहे हैं। अभी शनि ग्रह यहां पर 3 जून 2027 तक रहने वाले लेकिन 27 जुलाई 2026 को रात्रि 10:21 पर शनि यही मीन राशि में ही वक्री होने जा रहे हैं और यह यहां पर 11 दिसंबर 2026 की सुबह 3:51 तक वक्री रहने वाले हैं।
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विद्वान ज्योतिषियों से फोन पर बात करें और जानें शनि मीन राशि में वक्री का अपने जीवन पर प्रभाव
वैसे तो ज्योतिषी प्रेमी वक्री शब्द का मतलब जानते हैं लेकिन यदि किसी को इस शब्द को लेकर कोई कंफ्यूजन हो तो उन्हें बता दें की “वक्री” शब्द संस्कृत के “वक्र” शब्द से लिया गया है। जिसका अर्थ होता है टेढ़ा। जब ग्रह की गति अपने नियमित मार्ग से अलग हो जाती है, तब वह वक्री कहलाता है। यानी की ग्रह जिस तरह से चल रहा होता है यदि उसके विरुद्ध चलने लग जाए या उल्टा चलने लग जाए तो हम उसे वक्री कहते हैं।
हालांकि कुछ ज्योतिषियों का मानना है कि जब ग्रह वक्री हो जाता है तो वह और ज्यादा प्रभावशाली हो जाता है लेकिन ज्योतिषियों का एक बहुत बड़ा वर्ग ऐसा मानता है कि वक्री होने की अवस्था में ग्रह कमजोर हो जाता है और एक तरह से उल्टे परिणाम भी देना शुरू कर देता है। जैसे कि जो ग्रह आपको अच्छा परिणाम दे रहा होगा, वक्री होने की अवस्था में वही ग्रह अच्छे परिणाम देना बंद कर सकता है या अच्छे परिणाम देने में पीछे रह सकता है। दूसरे शब्दों में कहें तो इस तरह से आपके परिणाम खराब हो जाते हैं। यही सूत्र आप इसके विपरीत वाले परिणाम में भी लगा सकते हैं। यानी कि यदि कोई ग्रह आपको खराब परिणाम दे रहा होता है तो वक्री होने की अवस्था में उसके खराब परिणाम बंद हो सकते हैं या खराब परिणामों में कमी आ सकती है और इस तरह से आपको फायदा मिल सकता है।
यदि हम वर्तमान मुद्दे यानी कि शनि के मीन राशि में वक्री होने की बात करें तो वक्री होने के कारण शनि कुछ राशियों को कमजोर परिणाम दे सकता है या शनि के वक्री होने से कुछ राशियों को कमजोर परिणाम मिल सकते हैं। तो वहीं कुछ राशियों को शनि के वक्री होने का फायदा भी मिल सकता है। शनि के वक्री होने का आपकी राशि पर यानी कि आप पर कैसा प्रभाव पड़ेगा, यह जानने से पहले संक्षेप में जान लिया जाय कि शनि के वक्री होने का भारतवर्ष पर कैसा प्रभाव पड़ सकता है?
शनि मीन राशि में वक्री: भारत पर प्रभाव
वैसे भारतवर्ष की कुंडली को लेकर अलग-अलग विद्वानों के अलग-अलग मत हैं, क्योंकि 15 अगस्त 1947 को भारत आजाद हुआ था न कि भारत बना था लेकिन आजाद भारत की कुंडली को लेकर अधिकांश विद्वान एकमत हैं और आजाद भारत की कुंडली वृषभ लग्न की मानी गई है। इस कुंडली के अनुसार शनि ग्रह भाग्य तथा कर्म भाव का स्वामी होता है। क्योंकि कर्म भाव के स्वामी शनि ग्रह लाभ भाव में वक्री हो रहे हैं तो स्वाभाविक है कि सत्तारूढ़ दलों के रास्ते में कुछ व्यवधान आ सकते हैं। सरकार जिन योजनाओं पर काम कर रही थी उन योजनाओं में कुछ व्यवधान आ सकते हैं या उसके परिणाम उल्टे हो सकते हैं।
जैसे सरकार जनहित के किसी बड़े मामले में काम कर रही हो, जिससे लोगों का भला हो लेकिन उसी मामले में लोग सरकार को घेरने का काम कर सकते हैं या सरकार का विरोध कर सकते हैं। जनता के बीच असंतोष देखने को मिल सकता है। विदेशी मामलों में कुछ ऐसी स्थितियां निर्मित हो सकती हैं जहां कई देशों की यात्रा करना भारतीय जनता के लिए पेचीदा हो सकता है। अर्थव्यवस्था के दृष्टिकोण से भी शनि का वक्री होना अच्छा नहीं कहा जाएगा। यानी कि भारतवर्ष के लिए वक्री होने के बाद शनि ग्रह पाॅजिटीविटी के ग्राफ में कमी दे सकते हैं। शनि के वक्री होने से आपकी राशि पर कैसा असर पड़ेगा? आइए जानते हैं और सबसे पहले चर्चा करते हैं मेष राशि की…
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शनि मीन राशि में वक्री: राशि अनुसार प्रभाव और उपाय
मेष राशि
मेष राशि वालों के लिए शनि ग्रह आपकी कुंडली में कर्म तथा लाभ भाव के स्वामी होते हैं। यानी कि दशम भाव और एकादश भाव के स्वामी होते हैं और शनि आपके द्वादश भाव में गोचर करते हुए वक्री हो रहे हैं। क्योंकि सामान्य तौर पर द्वादश भाव में शनि के गोचर को अच्छा नहीं माना गया है। क्योंकि चंद्र कुंडली के अनुसार शनि का द्वादश भाव में गोचर साढ़ेसाती का पहला चरण होता है। यानी सामान्य अवस्था में शनि यहां पर नकारात्मक परिणाम देने वाले माने गए हैं। ऐसे में शनि का वक्री होना उस नकारात्मकता में कमी देने का काम करेगा।
सीधे शब्दों में कहें तो शनि का वक्री होना आपके लिए फायदेमंद रह सकता है लेकिन स्वामित्व के आधार पर शनि का वक्री होना कुछ मामलों के लिए ठीक नहीं माना गया है। जैसे कि कार्यक्षेत्र में कुछ धीमापन देखने को मिल सकता है। कुछ काम आगे बढ़ते बढ़ते अचानक से रुक सकते हैं। वहीं उपलब्धियां या लाभ भी मिलते मिलते अचानक से रुक सकते हैं। यानी की अच्छाइयों के मामले में भी कुछ परेशानियां आ सकती है।
सीधे शब्दों में इन्हीं बातों को कहें तो शनि के वक्री होने से आपके काम धंधे पर कुछ असर पड़ सकता है। काम धंधे में देरी हो सकती है। लाभ की प्राप्तियां में भी कुछ व्यवधान आ सकता है लेकिन खर्चे में कमी आएगी, संचित धन जो बेवजह खर्च हो रहा था वह भी सुरक्षित रहेगा। व्यर्थ की भाग दौड़ भी अब कम हो जाएगी। यानी कुछ अच्छाइयां तो कुछ कमियां शनि के वक्री होने से आपके हिस्से में आ सकती है।
उपाय: उपाय की बात करें तो उपाय के रूप में नियमित रूप से हनुमत साठिका का पाठ करना शुभ रहेगा। आइए अब जानते हैं कि शनि का मीन राशि में वक्री होना वृष राशि वाले लोगों को कैसे परिणाम दे सकता है?
वृषभ राशि
वृषभ राशि वालों के लिए शनि ग्रह आपकी कुंडली में भाग्य तथा कर्म भाव के स्वामी होते हैं। यानी की नवम तथा दशम भाव के स्वामी होते हैं और ये आपके लाभ भाव में गोचर करते हुए वक्री हो रहे हैं। क्योंकि शनि ग्रह आपके लाभ भाव में गोचर कर रहे हैं और लाभ भाव में शनि के गोचर को अच्छे परिणाम देने वाला माना गया है। आपकी कुंडली के लिए शनि केंद्र और त्रिकोण दोनों जगह के स्वामी होने के कारण सबसे अच्छे ग्रह यानि कि “योगकारक” ग्रह भी माने गए हैं। लाभ भाव में पहुंचा हुआ योगकारक विविध प्रकार से लाभ देने का काम करता है लेकिन वक्री हो जाने के कारण शनि के लाभ देने की गति धीमी हो सकती है या थम सकती है। यानी कि आपकी प्राप्तियों में व्यवधान आ सकते हैं।
कामों में भी कुछ धीमापन देखने को मिल सकता है। भाग्य का भी सपोर्ट तुलनात्मक रूप से कम रह सकता है। पिता को लेकर कुछ चिंताएं रह सकती हैं। कोई ऐसा व्यक्ति जो पिता की उम्र का हो और आप उस पर निर्भर रहे हों; उसका सपोर्ट भी इस अवधि में नहीं मिल पाएगा। यानी कि शनि का वक्री होना आपके लिए हर लिहाज से एक कमजोर बिंदु माना जाएगा।
या यूं कहें कि शनि का वक्री होना आपके लिए ठीक नहीं है। अतः शनि के वक्री रहने की अवधि में सावधानी पूर्वक निर्वाह की जरूरत रहेगी। यद्यपि कोई नुकसान नहीं होगा लेकिन जो उपलब्धियां मिल रही थीं उनमें कमी आएगी। जो एक तरीके का घाटा ही माना जाएगा। सीधे शब्दों में कहीं तो शनि के वक्री होने से नए सिरे से कोई नुकसान नहीं होगा लेकिन उपलब्धियों के धीमा होने से आप कुछ हद तक कठिनाई या परेशानी का अनुभव कर सकते हैं।
उपाय: उपाय की बात करें तो उपाय के रूप में प्रत्येक शनिवार सुंदरकांड का पाठ करना शुभ रहेगा। आइए अब जानते हैं कि शनि का मीन राशि में वक्री होना मिथुन राशि वाले लोगों को कैसे परिणाम दे सकता है?
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मिथुन राशि
मिथुन राशि वालों के लिए शनि ग्रह आपकी कुंडली में अष्टम तथा भाग्य भाव के स्वामी होते हैं और यह आपके कर्म स्थान में गोचर करते हुए वक्री हो रहे हैं। क्योंकि दशम भाव में शनि के गोचर को अच्छे परिणाम देने वाला नहीं माना गया है। ऐसे में शनि का वक्री होना आपके लिए अधिकांश मामलों में अनुकूलता देने का काम कर सकता है। आपकी चिंता तुलनात्मक रूप से कम हो सकती है। खर्च भी कम हो सकते हैं। आपसी अनबन, विशेषकर यदि आप विवाहित हैं तो पति-पत्नी के बीच में चल रही अनबन भी दूर हो सकती है।
यदि आप लंबे समय से नौकरी की तलाश में रहे हैं और अभी तक सफलता नहीं मिली थी तो शनि के वक्री होने से आपको जॉब मिल सकती है। हालांकि जो लोग पहले से जॉब कर रहे हैं उन्हें अपने जॉब को लेकर सीरियस होने की जरूरत रहेगी। यानी जॉब में किसी भी प्रकार के लापरवाही नहीं बरतनी है लेकिन जॉबलेस लोगों को जॉब मिल भी सकती है। यदि आपको किसी व्यक्ति ने कभी अपमानित किया था तो शनि के वक्री होने से उसे इस बात का रिलाइजेशन हो सकता है कि उससे गलती हुई है।
यदि किसी सरकारी काम में बेवजह उलझाव आया था तो उसका कोई सॉल्यूशन भी मिल सकता है। यानी कि शनि के वक्री होने से ज्यादातर मामलों में आपको अनुकूल परिणाम मिल सकते हैं। बस पिता से संबंधित मामले और धार्मिक मामले में कुछ नकारात्मकता भी देखने को मिल सकती है। सीधे शब्दों में कहें तो शनि का वक्री होना आपके लिए अधिकांश मामलों में अनुकूल परिणाम देने का काम कर सकता है।
उपाय: उपाय की बात करें तो उपाय के रूप में प्रत्येक शनिवार को शिव जी के मंदिर में काले तिल के बने हुए लड्डू चढ़ाना शुभ रहेगा। आइए अब जानते हैं कि शनि का मीन राशि में वक्री होना कर्क राशि वाले लोगों को कैसे परिणाम दे सकता है?
कर्क राशि
कर्क राशि वालों के लिए शनि ग्रह आपकी कुंडली में सप्तम तथा अष्टम भाव के स्वामी होते हैं और ये आपके भाग्य भाव में गोचर करते हुए वक्री हो रहे हैं। क्योंकि भाग्य भाव में शनि के गोचर को बहुत अच्छे परिणाम देने वाला नहीं माना गया है। अतः शनि के वक्री होने से यदि शनि के कारण कोई परेशानी हो रही थी तो उसमें धीमापन आ सकता है। हालांकि प्रैक्टिकली देखा जाय तो भाग्य भाव में शनि न तो बहुत सकारात्मक है न ही बहुत नकारात्मक। ऐसे में वक्री होने का न तो कोई नकारात्मक प्रभाव पड़ना चाहिए न ही सकारात्मक। स्वामित्व के आधार पर देखें तो रोजमर्रा के कामों में कुछ अड़चने देखने को मिल सकती हैं। पिता को लेकर भी कुछ चिंताएं रह सकती हैं।
पहले से कोई चिंता रही है तो वह दूर भी हो सकती है लेकिन नए सिरे से चिंता के आने के योग भी बन रहे हैं। कोई ऐसा काम जो अचानक से बन गया था उसमें अब कुछ व्यवधान देखने को मिल सकते हैं। यानी कि शनि के वक्री होने से कोई उल्लेखनीय या बहुत बड़ा परिवर्तन तो नहीं होगा लेकिन छोटे-मोटे मामलों में कुछ फेरबदल हो सकता है। विशेषकर दैनिक रोजगार, भाग्य और पिता से संबंधित मामलों में जागरूकता दिखाने की जरूरत रहेगी। जागरूक रहने की स्थिति में किसी भी तरीके का कोई नकारात्मक परिणाम नहीं मिलेगा और जो जैसा चलता रहा है, आप उसे देर सबेर मेंटेन करके उसी तरह के परिणाम प्राप्त करते रहेंगे।
उपाय: उपाय की बात करें तो उपाय के रूप में संभव हो तो प्रतिदिन अन्यथा कम से कम शनिवार के दिन संध्या के समय पीपल के वृक्ष के नीचे तिल के तेल का दीपक जलाना शुभ रहेगा। आइए अब जानते हैं कि शनि का मीन राशि में वक्री होना सिंह राशि वाले लोगों को कैसे परिणाम दे सकता है?
सिंह राशि
सिंह राशि वालों के लिए शनि ग्रह आपकी कुंडली में छठे तथा सातवें भाव के स्वामी होते हैं और ये आपके अष्टम भाव में गोचर करते हुए वक्री हो रहे हैं। चंद्र कुंडली के अनुसार अष्टम भाव में शनि का गोचर शनि की ढैया माना जाता है, यानी कि अच्छा नहीं माना जाता। लग्न कुंडली के अनुसार भी शनि के गोचर को अष्टम भाव में अच्छे परिणाम देने वाला नहीं माना गया है। ऐसे में यदि अष्टम भाव में पहुंचकर शनि आपको किसी भी प्रकार की कोई नकारात्मकता दे रहे थे तो शनि के वक्री होने से वह नकारात्मकता थम सकती है।
हालांकि आपके पहले भाव में राहु केतु का प्रभाव जीवन में कुछ उतार-चढ़ाव देने का काम कर रहा हो सकता है। ऐसे में ये हो सकता है कि वो उतार-चढ़ाव अब भी जारी रहे लेकिन इसके पीछे शनि के गोचर का हाथ नहीं होगा। क्योंकि हम यहां पर सिर्फ और सिर्फ शनि के गोचर की बात कर रहे हैं तो शनि के द्वारा दिए जा रहे नकारात्मक परिणामों में अब कभी देखने को मिलेगी। कड़ी मेहनत के बाद भी यदि किसी काम में अभी तक सफलता नहीं मिल रही थी, तो अचानक से वह काम सफल हो सकता है। पत्नी के साथ चल रहा है विवाद भी अब थम सकता है। सरकारी कामों में आ रही अड़चनों का कोई सॉल्यूशन अचानक से मिल सकता है।
यदि पिता को कोई परेशानी थी तो इसका सॉल्यूशन भी मिल सकता है। विद्यार्थियों को भी शनि के वक्री होने से तुलनात्मक रूप से बेहतर परिणाम मिलते हुए प्रतीत हो रहे हैं। यानी कि शनि का वक्री होना आपको कई मामलों में अच्छे परिणाम दिला सकता है। बस स्वामित्व के आधार पर देखें तो दैनिक रोजगार, दांपत्य जीवन एवं प्रतिस्पर्धा के मामले में लापरवाह नहीं होना है। यानी इन मामलों में जागरुक रहेंगे तो तुलनात्मक रूप से बेहतर परिणाम मिलने की उम्मीद आप रख सकेंगे।
उपाय: उपाय की बात करें तो उपाय के रूप में प्रतिदिन कम से कम एक माला महामृत्युंजय मंत्र का जप करना शुभ रहेगा। आइए अब जानते हैं कि शनि का मीन राशि में वक्री होना कन्या राशि वाले लोगों को कैसे परिणाम दे सकता है?
कन्या राशि
कन्या राशि वालों के लिए शनि ग्रह आपकी कुंडली में पंचम तथा छठे भाव के स्वामी होते हैं और यह आपके सप्तम भाव में गोचर करते हुए वक्री हो रहे हैं। क्योंकि सप्तम भाव में शनि के गोचर को अच्छे परिणाम देने वाला नहीं माना गया है तो ऐसे में सप्तम भाव में पहुंचे हुए शनि के द्वारा दिए जा रहे नकारात्मक परिणामों में अब कमी देखने को मिल सकती है। यदि हाल फिलहाल जननेंद्रियों से संबंधित आपको कोई समस्या आई थी तो उस समस्या का समाधान आपको मिल सकता है। हालांकि यात्राओं में व्यवधान अब भी रह सकता है लेकिन समस्याएं पहले की तुलना में कम होंगी।
जीवनसाथी या जीवनसंगिनी के साथ चल रही अनबन को विराम लग सकता है। दैनिक रोजगार में सफलता मिलने की संभावनाएं भी तुलनात्मक रूप से मजबूत होंगी। यानी कि शनि की कई नकारात्मकताएं शांत हो सकती हैं या कम हो सकती हैं लेकिन पंचम भाव के स्वामी का वक्री होना प्रेम संबंधों के मामलों में कुछ अड़चन देने का काम कर सकता है। वहीं छठे भाव के स्वामी का वक्री होना जीवन में प्रतिस्पर्धा को बढ़ा सकता है। कहने का तात्पर्य यह है कि शनि के वक्री होने से कई परेशानियां कम होंगी लेकिन कुछ एक मामलों में परेशानियां आ भी सकती हैं तुलना की जाय तो इनमें अच्छाइयां अधिक रहेंगी।
उपाय: उपाय की बात करें तो उपाय के रूप में प्रत्येक शनिवार को काली उड़द के पकोड़े बनाकर गरीबों में बांटना शुभ रहेगा। आइए अब जानते हैं कि शनि का मीन राशि में वक्री होना तुला राशि वाले लोगों को कैसे परिणाम दे सकता है?
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तुला राशि
तुला राशि वालों के लिए शनि ग्रह आपकी कुंडली में चतुर्थ तथा पंचम भाव के स्वामी होते हैं और यह आपके छठे भाव में गोचर करते हुए वक्री हो रहे हैं। क्योंकि शनि आपके छठे भाव में गोचर करते हुए वक्री हो रहे हैं तो इस वक्री होने को बहुत अच्छा नहीं माना जाएगा, क्योंकि छठे भाव में शनि का गोचर सामान्य तौर पर अच्छे परिणाम देने वाला माना गया है। ऐसे में अच्छाई दे रहे ग्रह की दिशा बदल जाए तो अच्छाइयों की डिलीवरी होने में विलंब लग सकता है या अच्छाइयां पूर्ण रूप से डिलीवर होने में भी संदेह रह सकता है। खेती किसानी से संबंध रखने वाले लोगों को तुलनात्मक रूप से अधिक मेहनत करनी पड़ सकती है और मेहनत की तुलना में उपज या उपलब्धियां कम रह सकती हैं।
सुख की अनुभूति करने में भी व्यवधान रह सकता है। यानी कि सुख आपके आसपास ही रहेगा लेकिन आप उसे महसूस नहीं कर पाएंगे या महसूस करने में पीछे रह सकते हैं। कभी-कभार स्वास्थ्य भी थोड़ा बहुत नरम गरम रह सकता है लेकिन इसका मतलब यह नहीं की शनि के वक्री होने से आपको नकारात्मक परिणाम मिलेंगे। यहां पर यह बात समझने की है कि शनि जिस लेवल की अच्छाइयां दे रहा था उस लेवल की अच्छाइयां मिलने में विलंब हो सकता है, समय लग सकता है अथवा ऐसा भी हो सकता है कि उस लेवल की अच्छाई न मिलें, अच्छाइयों का ग्राफ कुछ कम रहे लेकिन फिर भी समय को अनुकूल ही कहा जाएगा।
वहीं चतुर्थ भाव के स्वामी का वक्री होना घर गृहस्थी को लेकर थोड़ा बहुत तनाव देने का संकेतक है। पंचम भाव के स्वामी का वक्री होना लव लाइफ में कुछ व्यवधान आने का संकेतक है। कुल मिलाकर अच्छाइयां बनी रहेंगी लेकिन अच्छाइयों का ग्राफ मामूली सा घट सकता है या कम हो सकता है।
उपाय: उपाय की बात करें तो उपाय के रूप में जब भी संभव हो अपनी सामर्थ्य के अनुसार गरीबों और मजदूरों को भोजन करवाएं, ऐसा करना शुभ रहेगा। आइए अब जानते हैं कि शनि का मीन राशि में वक्री होना वृश्चिक राशि वाले लोगों को कैसे परिणाम दे सकता है?
वृश्चिक राशि
वृश्चिक राशि वालों के लिए शनि ग्रह आपकी कुंडली में तीसरे तथा चौथे भाव के स्वामी होते हैं और यह आपके पंचम भाव में गोचर करते हुए वक्री हो रहे हैं। क्योंकि पंचम भाव में शनि के गोचर को अच्छा नहीं माना जाता। ऐसे में शनि की वक्री होने से शायद कुछ फायदे भी आपको मिल सकते हैं। क्योंकि पंचम स्थान में गोचर करने वाला शनि संतान से संबंधित मामलों में व्यवधान देने वाला माना गया है। ऐसे में शनि के वक्री होने से ऐसा हो सकता है कि नए सिरे से संतान की प्राप्ति करने वाले लोगों को भले ही व्यवधान देखने को मिले लेकिन संतान के साथ चल रही गलतफहमियां दूर होने की संभावनाएं बढ़ जाएंगी।
यदि आपने किसी ऐसी जगह निवेश किया था जहां से आपको घाटा हो रहा था तो शायद उस मामले में संशोधन करने का कोई मौका आपको मिल सकता है। हालांकि यात्राओं के दौरान व्यवधान आने और घर गृहस्थी को लेकर कुछ कठिनाइयां आने की संभावनाएं भी बन रही है लेकिन संतान और शिक्षा से संबंधित मामलों में कुछ अच्छे परिणाम भी देखने को मिल सकते हैं।
उपाय: उपाय की बात करें तो उपाय के रूप में संभव हो तो प्रतिदिन अन्यथा कम से कम प्रत्येक शनिवार को शिवलिंग पर काले और सफेद तिल मिलाकर चढ़ाना शुभ रहेगा। आइए अब जानते हैं कि शनि का मीन राशि में वक्री होना धनु राशि वाले लोगों को कैसे परिणाम दे सकता है?
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धनु राशि
धनु राशि वालों के लिए शनि ग्रह आपकी कुंडली में दूसरे तथा तीसरे भाव के स्वामी होते हैं और यह आपके चौथे भाव में गोचर करते हुए वक्री हो रहे हैं। चंद्र कुंडली के अनुसार चौथे भाव में शनि के गोचर को शनि की ढैया कहा जाता है। जिसे सामान्य तौर पर अच्छा नहीं माना गया है। ऐसे में जब शनि वक्री हो रहे हैं तो उस नकारात्मकता का रुख कहीं और मुड़ सकता है या यूं कहें कि उस नकारात्मकता का रुख आपकी ओर से हट सकता है। जिसका फायदा आपको मिल सकता है।
यदि किसी कारण से कोई अनचाहा स्थान परिवर्तन हो रहा था तो शनि के वक्री होने से उस स्थान परिवर्तन में कुछ समय के लिए आपको राहत मिल सकती है। स्वजनों से कोई विरोध या गलतफहमी रही है तो उस गलतफहमी के दूर होने से विरोध भी शांत होगा। सुख का ग्राफ भी तुलनात्मक रूप से बढ़ सकता है। वाहन में आ रही खराबी से आपको राहत मिल सकती है।
जिन लोगों को सीने से संबंधित कोई परेशानी इस समय ज्यादा थी; उसमें भी राहत मिलने की संभावनाएं बढ़ जाएगी। यानी कि शनि वक्री होने से आपको कई फायदे मिलने वाले हैं लेकिन शनि के वक्री होने से आर्थिक और पारिवारिक मामले में कुछ असंतोष भी उत्पन्न हो सकता है। पड़ोसियों का बर्ताव भी थोड़ा सा बदला हुआ लग सकता है लेकिन अच्छाइयां ज्यादा रहेगी लिहाजा सीधे शब्दों में कहें तो शनि का वक्री होना किसी न किसी रूप में आपके लिए फायदेमंद रह सकता है।
उपाय: उपाय की बात करें तो उपाय के रूप में नियमित रूप से हनुमान चालीसा का पाठ करना शुभ रहेगा। आइए अब जानते हैं कि शनि का मीन राशि में वक्री होना मकर राशि वाले लोगों को कैसे परिणाम दे सकता है?
मकर राशि
मकर राशि वालों के लिए शनि ग्रह आपकी कुंडली में आपकी लग्न या राशि के स्वामी होते हुए दूसरे भाव के भी स्वामी होते हैं तथा यह आपके तीसरे भाव में गोचर करते हुए वक्री हो रहे हैं। क्योंकि तीसरे भाव में शनि के गोचर को अच्छे परिणाम देने वाला माना गया है और तीसरे भाव में गोचर करते हुए शनि वक्री हो रहे हैं तो स्वाभाविक है कि अच्छाई की स्पीड कम हो सकती है अथवा अच्छाई का रुख दूसरी ओर हो सकता है। यानी कि शनि के वक्री होने से आपको कुछ घाटा हो सकता है। कुछ घाटा शब्द इसलिए प्रयोग कर रहा हूं क्योंकि शनि अभी भी तीसरे भाव में है।
जो आपको अच्छे परिणाम ही देना चाहेंगे लेकिन अच्छे परिणामों का रुख बदला हुआ रह सकता है या उनकी गति धीमी रह सकती है लेकिन परिणाम अच्छे ही मिलेंगे। क्योंकि आपकी लग्न या राशि के स्वामी भी शनि ग्रह ही हैं और वह वक्री हो रहे हैं। अतः वक्री होने की अवधि में आपको अपने स्वास्थ्य का ख्याल रखना जरूरी रहेगा। मित्र, भाइयों और पड़ोसियों के साथ संबंधों को मेंटेन करने की भी जरूरत रहेगी। जब आप उनके साथ संबंधों को मेंटेन रखेंगे तभी आप प्रतिस्पर्धात्मक कार्यों में या विरोधियों से आगे निकलने में कामयाब हो सकेंगे।
कहीं से कोई समाचार मिले तो उस पर रिएक्ट करने से पहले उसकी सच्चाई की पड़ताल जरूर कर लिया करें और मिलजुल कर काम करने की कोशिश करें। एक दूसरे के प्रति गलतफहमी न पालें तभी आप बेहतर परिणाम प्राप्त कर सकेंगे। हालांकि लग्न या राशि के स्वामी के वक्री होने से स्वास्थ्य का ख्याल रखना जरूरी रहेगा। धन भाव के स्वामी के वक्री होने के कारण आर्थिक और पारिवारिक मामले में भी जागरूक रहने की जरूरत रहेगी। सीधे शब्दों में कहें तो शनि के वक्री होने से आपको कोई नुकसान नहीं होगा बस फायदे का ग्राफ थोड़ा सा कम हो सकता है। साथ ही साथ कुछ मामलों में विशेष जागरूक रहने की जरूरत पड़ सकती है।
उपाय: उपाय की बात करें तो उपाय के रूप में दशरथकृत शनिस्त्रोत का पाठ करना शुभ रहेगा। आइए अब जानते हैं कि शनि का मीन राशि में वक्री होना कुंभ राशि वाले लोगों को कैसे परिणाम दे सकता है?
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कुंभ राशि
कुंभ राशि वालों के लिए शनि ग्रह आपकी कुंडली में आपकी लग्न या फिर आपकी राशि के स्वामी होने के साथ साथ द्वादश भाव के भी स्वामी होते हैं और यह आपके दूसरे भाव में गोचर करते हुए वक्री हो रहे हैं। शनि के वक्री होने से आपको मिले-जुले परिणाम मिल सकते हैं। एक ओर जहां लग्न या राशि के स्वामी का वक्री होना कुछ मामलों में कठिनाई और कमजोरी का संकेतक है, तो वही शनि की साढ़ेसाती के अंतिम चरण में शनि का वक्री होना कुछ कठिनाइयों के आसान होने का संकेतक है। इसीलिए आपको मिले-जुले परिणाम मिल सकते हैं। घर परिवार की अशांति का कोई सॉल्यूशन मिल सकता है। आर्थिक मामले में हो रही अवस्था का भी कोई समाधान मिल सकता है। यानी कि आपको कोई ऐसा रास्ता मिल सकता है जिससे आप धनहानि रोक सकते हैं और पारिवारिक मामलों में अनुकूलता ला सकते हैं।
आंख और दांत से संबंधित यदि कोई परेशानी आपको रही है तो उसका बेहतर सॉल्यूशन आपको मिल सकता है। यदि किसी कारण से शारीरिक या मानसिक रूप से कोई पारिवारिक दूरी बढ़ रही थी, तो उस दूरी के कम होने के योग भी शनि के वक्री होने के कारण बनेंगे लेकिन शनि के वक्री होने से आपके स्वास्थ्य में भी कुछ कमजोरी देखने को मिल सकती है। अतः इस मामले में आपको सचेत रहने की आवश्यकता पड़ सकती है। विदेश में रहने वाले लोग या विदेश से संबंधित काम करने वाले लोगों को भी कुछ अड़चने देखने को मिल सकती हैं। यानी कि शनि का वक्री होना आपको मिले-जुले परिणाम दे सकता है।
उपाय: उपाय की बात करें तो उपाय के रूप में प्रतीक शनिवार को सुंदरकांड का पाठ करना शुभ रहेगा। आइए अब जानते हैं कि शनि का मीन राशि में वक्री होना मीन राशि वाले लोगों को कैसे परिणाम दे सकता है?
मीन राशि
मीन राशि वालों के लिए शनि ग्रह आपकी कुंडली में लाभ तथा व्यय दोनों भावों के स्वामी होते हैं यानी कि ग्यारहवें तथा बारहवें भाव के स्वामी होते हैं और शनि आपके पहले भाव में गोचर करते हुए वक्री हो रहे हैं। पहले भाव में शनि का गोचर अच्छा नहीं माना गया है। लग्न कुंडली से देखें तो उस लिहाज से भी यह अच्छी स्थिति नहीं है। वहीं चंद्र कुंडली से यह साढ़ेसाती का दूसरा फेस होता है। इसलिए शनि की नकारात्मकता कुछ हद तक कम हो सकती है लेकिन पहले भाव में शनि का वक्री होना भी अच्छा नहीं माना जाता। हो सकता है कि स्वास्थ्य के मामले में जिन्हें पहले से कोई समस्या थी उस समस्या का निदान मिल जाए लेकिन नए सिरे से कोई दूसरी समस्या भी आ सकती है। इसी तरह आमदनी के रास्ते में आ रही रुकावट दूर हो सकती है लेकिन दूसरी रुकावट भी आ सकती है।
विदेश से संबंधित मामले में भी कुछ इसी तरह के परिणाम मिल सकते हैं। यानी कि शनि का वक्री होना पुरानी समस्याओं को दूर करने का लेकिन नए सिरे से किसी नई समस्या के आने का संकेतक भी हो सकता है। कुल मिलाकर इस अवधि में अपने स्वास्थ्य का ख्याल रखना है। भाई बंधुओं के साथ संबंधों को मेंटेन करने की कोशिश करनी है। यदि सच में नए सिरे से विदेश जाना या दूर जाना बहुत जरूरी है तो आप जा सकते हैं लेकिन यदि बिना गए भी काम चल जाए तो शनि के वक्री रहने की अवधि में पहली बार दूर जाने की तैयारी को कैंसिल करना ही उचित रहेगा।
यदि आप पहले से ही बाहर रह रहे हैं और किसी कारण से घर आए थे और दोबारा फिर से अपने काम पर जाना चाह रहे हैं तो आपको कोई मनाही नहीं है। न केवल घर परिवार का बल्कि भाई बंधु और मित्रों का ख्याल भी शनि के वक्री रहने की अवधि में रखना होगा। व्यर्थ के आलस्य से बचना है। आर्थिक प्रबंधन पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता रहेगी। कोई ऐसा काम भी नहीं करना है जिससे आपको अपयश का भागीदार होना पड़े। यानी कि शनि के वक्री होने से कुछ फायदे तो कुछ नुकसान हो सकते हैं लेकिन इस अवधि में सभी मामलों में पूरी जागरुकता जरूरी रहेगी, तभी आप नकारात्मकता से स्वयं को बचा सकेंगे।
उपाय: उपाय की बात करें तो उपाय के रूप में संभव हो तो प्रतिदिन अन्यथा कम से कम शनिवार के दिन गजेंद्र मोक्ष स्तोत्र का पाठ करना शुभ रहेगा।
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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
1. शनि मीन राशि में वक्री कब होंगे?
शनि ग्रह 27 जुलाई 2026 को मीन राशि में वक्री होंगे।
2. शनि ग्रह कौन हैं?
ज्योतिष में शनि देव को न्याय और कर्मफल दाता माना गया है।
3. शनि ग्रह एक राशि में कितने दिन रहते हैं?
ज्योतिष के अनुसार, शनि ग्रह का राशि परिवर्तन ढाई वर्ष में होता है।
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