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केतु गोचर 2019

केतु गोचर 2019

हिंदू ज्योतिष शास्त्र में केतु को पापी ग्रह की संज्ञा दी गई है। हालांकि यह शुभ और अशुभ दोनों तरह के फल देता है। यह तर्क, बुद्धि, ज्ञान, वैराग्य और कल्पना आदि का कारक है। केतु के शुभ प्रभाव से मनुष्य के अंदर आध्यात्मिक गुणों का विकास होता है। वहीं यदि कुंडली में केतु अशुभ भाव में हो तो उस व्यक्ति को कष्टकारी परिणाम मिलते हैं। इस अवस्था मे व्यक्ति को स्वास्थ्य संबंधी परेशानी होती है। इसके अलावा इसकी प्रतिकूलता से दाद, खाज तथा कुष्ट रोग होते हैं।

07 मार्च 2019 को केतु ग्रह रात्रि 02:48 बजे धनु राशि में गोचर करेगा और 23 सितंबर 2020 को सुबह 05:28 बजे यह धनु राशि से वृश्चिक राशि में प्रवेश करेगा। तो आइये केतु गोचर 2019 के माध्यम से जानते हैं केतु के राशि परिवर्तन का सभी 12 राशियों पर क्या होगा असर?

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यह राशिफल चंद्र राशि पर आधारित है। चंद्र राशि जानने के लिए क्लिक करें चंद्र राशि कैलकुलेटर

मेष

केतु आपकी राशि से नौवें भाव में गोचर करेगा। कुंडली में नौवां भाव भाग्य और धर्म की विवेचना करता है। इस भाव में केतु की उपस्थिति आपके लिए कष्टकारी रह सकती है इसलिए इस समय आपको संभलकर क़दम बढ़ाने होंगे। आर्थिक क्षेत्र में नुकसान उठाना पड़ सकता है। धन की लेनदेन एवं निवेश में सावधानी बरतें अन्यथा आपको धन हानि हो सकती है। गोचर के दौरान आप पुराने ख़्यालात या फिर रुढ़िवादी विचारों के हो सकते हैं, आपके व्यवहार में भी इसका असर दिखाई पड़ेगा। कभी आप धार्मिक स्वभाव के होंगे तो कभी इसके विपरीत आपका स्वभाव होगा। गोचर के दौरान आप किसी तीर्थस्थल पर जा सकते हैं। केतु का प्रभाव आपके घरेलू जीवन पर देखने मिलेगा। घर में पिताजी की सेहत में कमी देखी जा सकती है अथवा उनके साथ आपका वैचारिक मतभेद हो सकता है। उनके प्रति अपने मन में हमेशा आदर का भाव रखें। लंबी दूरी की यात्रा आपके योग में दिखाई दे रही है।

उपायः काले तिल दान करें।

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वृषभ

केतु आपकी राशि से आठवें भाव में प्रवेश करेगा। कुंडली में आठवां भाव आयु का भाव होता है। केतु की आठवें भाव में उपस्थिति आपके लिए ज्यादा अनुकूल नहीं है। इस दौरान आध्यात्मिक एवं गूढ़ विषयों में आपकी रुचि बढ़ेगी। स्वास्थ्य जीवन के लिए यह समय चुनौतीपूर्ण रहेगा। आपकी सेहत में कमी देखी जा सकती है। स्वास्थ्य के प्रति किसी तरह की लापरवाही न बरतें बल्कि स्वास्थ्य कमज़ोर होने पर डॉक्टर की सलाह अवश्य लें। वहीं वाहन चलाते समय पूरी सावधानी बरतें। नशे में गाड़ी न चलाएं, अन्यथा आपको चोट आदि लग सकती है। आर्थिक क्षेत्र में केतु का असर दिखाई पड़ेगा। इस दौरान आपकी आय में कमी हो सकती है। निजी जीवन में अपने लोगों का बुरा बर्ताव आपको तनाव की ओर धकेल सकता है। दोस्तों में भी किसी प्रकार का मनमुटाव हो सकता है।

उपायः तिल का तेल दान करें।

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मिथुन

केतु आपकी राशि से सातवें भाव में संचरण करेगा। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार कुंडली में सातवां भाव वैवाहिक जीवन के बारे में बताता है। इस भाव में केतु का होना आपके लिए प्रतिकूल रहेगा। वैवाहिक जीवन में आपको कठिनाई का सामना करना पड़ सकता है। जीवनसाथी से मनमुटाव, मतभेद या फिर विवाद हो सकता है। इस स्थिति से बचने के लिए उनका सम्मान करें और उनकी भावनाओं को समझने का प्रयास करें। इसके अलावा उनपर बेवजह का शक न करे बल्कि उन पर भरोसा जताएं। आर्थिक क्षेत्र में केतु अपनी क्रूर दृष्टि बनाए हुए है इसलिए संपत्ति से संबंधित विवाद पैदा हो सकते हैं। पैृतक संपत्ति को लेकर विवाद होने की संभावना है। व्यापार में भी आपको इस गोचर के दुष्परिणामों का सामना करना पड़ सकता है। बिजनेस पार्टनर के साथ आपके मतभेद हो सकते हैं। कार्य में भी आपको बाधाओं का सामना करना पड़ सकता है।

उपायः गणेश की स्तुति करें और उन्हें दुरुव (घास) घास चढाएं।

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कर्क

केतु आपकी राशि से छठे भाव में गोचर करेगा। कुंडली में छठा भाव रोग, भय और क्षति का होता है। केतु के इस भाव में होना आपके लिए समस्या कारक रहेगा। इस दौरान आपको कई प्रकार की समस्याओं को सामना करना पड़ सकता है। आपके कार्य में रुकावटें आएंगी और सफलता पाने के लिए कड़ा संघर्ष करना पड़ेगा। स्वास्थ्य जीवन में भी कई प्रकार की दिक्कते आएंगी। सेहत को लेकर आपके सचेत रहें और क्योंकि केतु के प्रभाव के कारण आपकी सेहत में गिरावट आने की संभावना है। ऐसी स्थिति में चिकित्सक की सलाह अवश्य लें। गोचर की अवधि में आपका ख़र्च बढ़ेगा। बेवजह और अनावश्यक वस्तुओं पर आपका धन ख़र्च हो सकता है। इस दौरान धन का ख़र्च सोच-समझकर करें अन्यथा आपको आर्थिक संकट का सामना करना पड़ सकता है। इसके अलावा किसी से बात करते समय शालीनता दिखाएं। किसी को अपशब्द न कहें अन्यथा किसी से आपका झगड़ा हो सकता है। इस समय अनावश्यक विवाद भी सामने आ सकते हैं।

उपायः हनुमान जी की आराधना करें।

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सिंह

केतु आपकी राशि से पाँचवे भाव में जाएगा। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार कुंडली में पाँचवां भाव बुद्धि, विद्या एवं संतान को दर्शाता है। केतु के इस भाव में होना आपके लिए शुभ संकेत नहीं है। इस अवधि में आपको आर्थिक क्षेत्र में नुकसान उठाना पड़ सकता है। इसलिए धन के मामले में सावधान रहें। किसी शख़्स पर ज़रुरत से ज़्यादा भरोसा जताना आपके लिए उचित नहीं है। प्रेम जीवन में आपको विवाद का सामना करना पड़ सकता है। लव पार्टनर को ऐसी कोई बात नहें जिससे उनका दिल दुखे। क्योंकि यह समय प्रेम के मामलों के लिए कमज़ोर है। प्रियतम की भावनाओं का समझने का प्रयास करें। यदि साथी रूठ जाता है तो उसे प्यार सा तोहफ़ा देकर मनाने की कोशिश करें और ग़लतफहमी को तुरंत दूर करें। केतु के प्रभाव से आपको बौद्धिक क्षेत्र में नुकसान उठाना पड़ सकता है। छात्रों को पढ़ाई में ध्यान लगाना थोड़ा मुश्किल होगा। वहीं स्वास्थ्य जीवन में आपको प्रतिकूल परिणाम मिलेंगे। इस दौरान आपका स्वास्थ्य गिर सकता है। वहीं घर में बच्चों की सेहत मे कमी देखी जा सकती है। स्वस्थ्य शरीर के लिए स्वास्थ्य के प्रति संवेदनशील रहें और बच्चों की देखभाल करें।

उपायः भैरव देव के मंदिर में काला ध्वज चढ़ाएं।

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कन्या

केतु आपकी राशि से चौथे भाव में संचरण करेगा। कुंडली में चौथा भाव माता, सुख, वृद्धि और बंधु के संबंध को बताता है। इस भाव में केतु का होना आपके लिए अनुकूल नहीं है। केतु आपके पारिवारिक जीवन में अपनी बुरी नज़र बनाए हुए है। घर में अशांति का वातावरण रह सकता है और इस दौरान माता जी की सेहत में भी कमी आ सकती है। इसके अलावा अन्य प्रकार के भी गृह क्लेश संभव है। कार्यक्षेत्र में आपके ऊपर काम का बोझ रहेगा और आप अधिक व्यस्त दिखाई देंगे। काम के चलते आप अपने निजी जीवन को कम समय दे पाएंगे। कई बार ऐसा भी हो सकता है कि आप घर की ख़ुशियों से नदारद रहेंगे। मानसिक तनाव भी आपको अपने साये में ले सकता है। मन में एक असंतोष का भाव पैदा हो सकता है। आय की अपेक्षा ख़र्चा ज़्यादा है।

उपायः नीले पुष्प दान करें।

घर में होने वाले विवादों से हैं परेशान, पढ़ें: गृह क्लेश मिटाने के उपाय

तुला

केतु आपकी राशि से तीसरे भाव में गोचर करेगा। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार कुंडली में तीसरा भाव पराक्रम के साथ-साथ सहजता का होता है। इस भाव में केतु का होना आपके लिए शुभ है। इस अवधि में आपको विविध क्षेत्रों में सुखद परिणामों की प्राप्ति होगी। नौकरी में प्रमोशन के योग बन रहे हैं। अच्छा अवसर मिलने आप अपनी जॉब में परिवर्तन भी कर सकते हैं। आर्थिक क्षेत्र में आपको ज़बरदस्त लाभ मिलने के योग है। आय के स्रोतों में वृद्धि होगी और आपकी तिजोरी में धन आएगा। कार्यक्षेत्र में आपके अधीनस्थ कर्मी आपको सपोर्ट करेंगे। इस अवधि में आपकी संवाद शैली सबको प्रभावित करेगी। इसके ज़रिए आप दूसरों को इंप्रेस करेंगे। छोटी यात्रा आपके लिए लाभकारी सिद्ध होगी। इस अवधि में आपका साहस बढ़ेगा और आप चुनौतीपूर्ण कार्य को करने में पीछे नहीं हटेंगे। आप इस समय विदेश जाने की योजना बना सकते हैं।

उपायः केतु बीज मंत्र का जाप करें : ॐ स्रां स्रीं स्रौं सः केतवे नमः!

बिजनेस में सफलता पाने के लिए पढ़ें: व्यापर वृद्धि के उपाय

वृश्चिक

केतु आपकी राशि से दूसरे भाव में गोचर करेगा। कुंडली में दूसरा भाव जीवन में धन की विवेचना करता है। केतु के इस भाव में होना आपके लिए अशुभ संकेत है। इस ग्रह की क्रूर नज़र आपके आर्थिक क्षेत्र में होगी जिससे आपको धन की हानि संभव है। अपशब्दों के कारण आपका किसी से झगड़ा हो सकता है। पारिवारिक जीवन में भी चुनौतियांँ आएंगी। किसी ग़लतफहमी के कारण घर में विवाद हो सकता है। किसी कारण से परिजनों से दूर रहना पड़ सकता है। अचानक आपके ख़र्चों में वृद्धि होगी इससे धन की बचत में समस्या पैदा हो सकती है। जीवन में आ रही परेशानियों को लेकर आपको मानसिक तनाव भी हो सकता है। हालाँकि यह आपके स्वास्थ्य के लिए ठीक नहीं होगा इसलिए अपनी सेहत का ध्यान रखें। इस दौरान किसी से पैसे उधार न लें और न ही किसी को पैसा उधार दें।

उपायः नीले पुष्प दान करें।

पढ़ें भरंगी जड़ी के चमत्कारिक उपयोग: भरंगी जड़ी

धनु

केतु आपकी राशि में प्रवेश करेगा और यह आपके लग्न भाव में स्थित होगा। ज्योतिष के अनुसार लग्न भाव हमारे जन्म का भाव होता है। आपके इस भाव में केतु के होने से मिश्रित परिणाम मिलेंगे। इस दौरान अपनी सेहत का अवश्य ध्यान रखें। कोई पुराने समय से चली आ रही बीमारी पुनः जन्म ले सकती है। समय-समय पर अपने स्वास्थ्य का चेकअप अवश्य कराएं। आध्यात्म की ओर आपकी रुचि बढ़ेगी। आध्यात्म से आपको मानसिक सुकून प्राप्त होगा। इस दौरान आपके आसपास के लोगों को किसी प्रकार की समस्या का सामना करना पड़ सकता है। इस अवधि में आप अपने वैवाहिक जीवन से दूर जा सकते हैं।

उपायः महामृत्युंजय मंत्र का जाप करें।


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मकर

केतु आपकी राशि से बारहवें भाव में संचरण करेगा। कुंडली में यह भाव व्यय का होता है। केतु का इस भाव में होना आपके लिए कष्टकारी हो सकता है। आर्थिक क्षेत्र में आपको हानि हो सकती है। आपके ख़र्चों में तेज़ी से वृद्धि होगी। इस दौरान आप विदेश यात्रा पर जा सकते हैं। बच्चों का स्वास्थ्य कमज़ोर हो सकता है इसलिए उनकी सेहत का ख्याल रखें। यह आपके लिए शुभ नहीं होगा। इस अवधि शुभ कार्यों को टाला जा सकता है। कार्यक्षेत्र में आपके सामने चुनौतियाँ बाधाएँ बनकर सामने आएंगी। ध्यान रखें, इस समय किसी ग़ैर क़ानूनी काम में न पड़े, अन्यथा आपको जेल हो सकती है। परेशानियों के कारण आपको मानसिक तनाव भी रह सकता है। इस तनाव को अपने ऊपर हावी न होने दें।

उपायः विविध रंगों के कंबल दान करें।

फंसे या अटके हुए धन को प्राप्त करने के लिए पढ़ें: फंसा हुआ धन पाने के उपाय

कुंभ

केतु आपकी राशि से ग्यारहवें भाव में जाएगा। कुंडली में यह भाव इनकम और लाभ का भाव होता है। आपकी कुंडली के इस भाव में केतु उपस्थिति शुभकारक है। इस अवधि में आपको अनेक प्रकार की ख़ुशियों का अनुभव होगा। करियर में सफलता मिलेगी। नई नौकरी मिलने की प्रबल संभावना है अथवा नौकरी में प्रमोशन के योग बन रहे हैं। व्यापार में उन्नति होगी और व्यापार को बढ़ाने के लिए आपके पास सुनहरे अवसर आएंगे। केतु के आशीर्वाद से आपको अनेक माध्यमों से धन की प्राप्ति होगी। पारिवारिक जीवन में बच्चों की सेहत में कमी आ सकती है। ऐसी स्थिति में आप उनकी सेहत का ख़्याल रखें। वहीं छात्रों को पढ़ाई में कठिनाई का सामना करना पड़ सकता है। उच्च शिक्षा के किसी संस्थान में दाखिला पाना आपके लिए कठिन होगा। दोस्तों के साथ आप जमकर मस्ती करेंगे। आपका सामाजिक दायरा भी बढ़ेगा। सीनियर्स से सावधान रहें और अपने काम से ही मतलब रखें।

उपायः लहसुनिया रत्न धारण करें।


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मीन

केतु आपकी राशि से दसवें भाव में गोचर करेगा। कुंडली में यह भाव कर्म एवं पद-प्रतिष्ठा का भाव होता है। केतु की इस भाव में उपस्थिति आपके लिए अधिक अनुकूल नहीं है। हालाँकि इस दौरान आपको आर्थिक क्षेत्र में लाभ मिलने के योग हैं। धन की बचत में आप सफल रहेंगे और कई स्त्रोतों से जीवन में धन का आगमन होगा। कार्यक्षेत्र में कभी-कभार आपका मन दुःखी हो सकता है। इस दौरान आपके मन में निराशा का भाव छा सकता है। हालाँकि इस बीच आपके ऊपर काम का दबाव भी रहेगा। कार्य की अधिकता के कारण आप अपने निजी जीवन को कम समय दे पाएंगे। पारिवारिक जीवन में माता जी की सेहत में कमी आ सकती है इसलिए उनके स्वास्थ्य का ख़्याल रखें।

उपायः तिल का तेल दान करें।

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