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सूर्य का मेष राशि में गोचर (14 अप्रैल, 2019)

वैदिक ज्योतिष के अनुसार सूर्य नव ग्रहों के राजा हैं और अग्नि अथवा पित्त प्रकृति के द्योतक हैं। ये हर माह अपना राशि परिवर्तन करते हैं और एक राशि में लगभग 30 दिन की अवधि तक रहते हैं। सूर्य के एक राशि से दूसरे राशि में प्रवेश करने को ही गोचर या संचरण कहते हैं। इसको संक्रांति के नाम से भी जाना जाता है। चूंकि सूर्य को आत्मा, पिता, मान-सम्मान और उच्च सरकारी सेवा का कारक माना जाता है, इसलिए भी सूर्य के गोचर का प्रभाव अधिक महत्वपूर्ण हो जाता है। ज्योतिष अनुसार सूर्य ग्रह के शुभ प्रभाव से व्यक्ति को सरकारी और अन्य सेवाओं में बड़े पदों की प्राप्ति होती है।

सूर्य ग्रह को सिंह राशि का स्वामित्व प्राप्त होता है। जिसके अनुसार सूर्य देव सिंह राशि में मजबूत स्थिति में होते हैं। इसके अलावा मेष सूर्य ग्रह की उच्च राशि जबकि तुला नीच राशि कहलाती है। परिणामस्वरूप सूर्य देव अपनी उच्च राशि मेष में मजबूत तो नीच राशि तुला में कमजोर होते हैं। हालाँकि कमजोर सूर्य को मजबूत करने के उपाय भी वैदिक ज्योतिष में बताए गए हैं। जैसे: कुंडली में सूर्य ग्रह को शक्तिशाली बनाने हेतु सूर्य यंत्र की विधि विधान से स्थापना करने के पश्चात् आराधना की जानी चाहिए। इसके अलावा जातक माणिक्य रत्न धारण करने से भी सूर्य देव का आशीर्वाद प्राप्त कर सकते हैं। साथ ही एक मुखी रुद्राक्ष और बेल मूल भी ज्योतिष सूर्य ग्रह की शांति के लिए धारण करने की सलाह देते हैं।

सूर्य का मेष राशि में गोचर

पढ़ें: सूर्य को शांत करने के कुछ अन्य कारगर उपाय!

गोचर काल

जगत की आत्मा रूपी सूर्य देव एक बार फिर 14 अप्रैल 2019 रविवार को दोपहर 14:05 बजे अपनी उच्च राशि मेष में गोचर करेंगे और 15 मई 2019 तक इसी राशि में स्थित रहेंगे। सूर्य के अपनी उच्च राशि मेष में संचरण का प्रभाव सभी राशियों पर पड़ेगा। इस लेख में जानें समस्त 12 राशियों पर सूर्य के इस गोचर का क्या असर होगा?

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मेष

सूर्य का गोचर आपकी ही राशि में हो रहा है। इस दौरान सूर्य आपके लग्न भाव में स्थित होगा। ज्योतिष में लग्न भाव को तनु भाव कहा जाता है। कुंडली में यह पहला भाव भी होता है इस भाव से जातक के स्वभाव, शारीरिक संरचना एवं स्वास्थ्य जीवन को देखा जाता है। सूर्य के प्रभाव से आपके स्वभाव में परिवर्तन देखने को मिलेगा। इस दौरान आपको शीघ्र गुस्सा आ सकता है। ऐसे में अपने गुस्से को शांत करने का प्रयास करें अन्यथा आपका यह गुस्सा किसी झगड़े का कारण बन सकता है। इस दौरान आपको सरकारी कामकाज में लाभ मिलने की प्रबल संभावना है। करियर अथवा व्यवसाय में आपका कद ऊँचा हो सकता है। आपको अपने कार्यक्षेत्र में नेतृत्व करने का मौक़ा मिल सकता है। इस दौरान अगर आप सोच समझकर कोई भी निर्णय लेंगे तो उसमें आपको लाभ मिलेगा। यह लाभ आर्थिक और सामाजिक रूप में हो सकता है। पारिवारिक जीवन दृष्टि से गोचर को देखें तो आपको इससे लाभ हो सकता है। पिताजी को इस दौरान किसी क्षेत्र में लाभ की प्राप्ति हो सकती है।

उपाय: शनिवार के दिन ज़रूरतमंद मरीज़ों को दवा बाँटें।

वृषभ

सूर्य आपकी राशि से द्वादश भाव में संचरण करेगा। ज्योतिष में यह भाव व्यय भाव कहलाता है। इस भाव से ख़र्चे, हानि, मोक्ष, विदेश यात्रा आदि का ज्ञात होता है। सूर्य का ये गोचर आपकी विदेश जाने की इच्छा को पूरा कर सकता है। इस दौरान आपके विदेश यात्रा पर जाने के योग हैं। वहीं जो जातक पहले ही विदेश में बसे या फिर जॉब के लिए गए हैं उनके करियर का ग्राफ़ ऊँचा होगा। सेहत के नज़रिए से सूर्य का गोचर वृषभ राशि के जातकों के लिए थोड़ी परेशानी पैदा कर सकता है। इस दौरान आपको बुखार, सिरदर्द जैसी तकलीफ़ से गुजरना भी पड़ सकता है। लिहाज़ा अपनी सेहत का ख़्याल रखें और ज़रुरत पड़ने पर चिकित्सक से सलाह लें। इस अवधि में आप अपने विरोधियों पर हावी रहेंगे। वे आपका सामना करने से डरेंगे। आर्थिक रूप से आप प्रॉपर्टी की ख़रीददारी भी कर सकते हैं। हालाँकि आपके ख़र्चों में ज़बरदस्त वृद्धि होने की संभावना है। ऐसे में आपको अपने ख़र्चों पर काबू पाना होगा। ज़रुरत की चीज़ों पर ही पैसा ख़र्च करें।

उपाय: पार्क अथवा मंदिर परिसर में श्वेतार्क का पौधा लगाएँ।

मिथुन

मिथुन राशि की कुंडली में सूर्य का गोचर एकादश भाव में होगा। ज्योतिष में एकादश भाव को आमदनी का भाव कहा जाता है। इस भाव से आय, जीवन में प्राप्त होने वाली सभी प्रकार की उपलब्धियाँ, मित्र, बड़े भाई-बहन आदि को देखा जाता है। इस अवधि में आपको आर्थिक लाभ मिलेगा। जिससे आपकी आमदनी में वृद्धि हो सकती है या फिर आय के स्रोतों में बढ़ोतरी संभव है। धन की बचत कर पाने में आप सफल होंगे। समाज में मान-सम्मान प्राप्त होगा और आपकी प्रसिद्धि भी बढ़ेगी। कार्यक्षेत्र में कुशल रणनीति से आप लाभान्वित होंगे। वहीं ज़रुरत पड़ने पर बड़े भाई-बहनों का सहयोग प्राप्त होगा। कठिन समय में वे आपकी मदद को तैयार रहेंगे। सूर्य का गोचर आपकी अपूर्ण इच्छा को पूरी कर सकता है। वहीं प्रेम जीवन में आपको उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है। परिवार में आपके बड़े भाई-बहन समय का पूरा आनंद लेंगे। उन्हें लाभ की प्राप्त भी संभव है।

उपाय: अपनी नग्न आँखों से उगते हुए सूर्य को देखें।

कर्क

सूर्य का गोचर आपके दशम भाव में होगा। ज्योतिष में दशम भाव जातक के करियर, पिता, स्थिति, रुतबा, राजनीति एवं जीवन के लक्ष्यों की व्याख्या करता है। इसे कर्म भाव भी कहा जाता है। कर्क राशि के जातकों के जीवन पर सूर्य के गोचर का प्रभाव अनुकूल होगा। मुख्य रूप से आपको कार्य क्षेत्र में लाभकारी परिणामों की प्राप्ति होगी। कार्य के प्रति आपका मन लगेगा और आप अपने कार्य से सीनियर्स को प्रभावित करेंगे। सराहनीय कार्यों की वजह से आपका मान-सम्मान और रुतबा बढ़ेगा। आपके सीनियर्स और जूनियर्स दोनों ही आपसे सलाह लेंगे। हालाँकि इस बीच यह ध्यान रखने की आवश्यकता है कि आपके अंदर कहीं अहं की भावना जागृत न हो जाए। क्योंकि अहंकार आपके प्रगति के मार्ग पर बाधा पहुँचा सकता है। सरकारी काम-काज को लेकर आपको निराश नहीं होना पड़ेगा। इन सबके बीच पिता की सेहत का ख़्याल रखें, क्योंकि उनकी सेहत में गिरावट होने की संभावना है और यह आपके लिए मानसिक तनाव का कारण बन सकता है। जहाँ तक आपके व्यवसाय की बात है तो इसमें भी आपको सुखद परिणाम प्राप्त हो सकते हैं। शत्रु पक्ष आप से भयभीत रहेगा।

उपाय: रोजाना हनुमान चालीसा का पाठ करें।

सिंह

सूर्य आपकी राशि से नवम भाव में प्रवेश करेगा। ज्योतिष में नवम भाव को भाग्य भाव कहते हैं। इस भाव से व्यक्ति के भाग्य, गुरु, धर्म, यात्रा, तीर्थ स्थल, सिद्धातों का विचार किया जाता है। गोचर के दौरान सिंह राशि के जातकों का समाज में सम्मान बढ़ेगा और लोग आपके पास सलाह मशवरा लेने के लिए आएँगे। वहीं आपको भाग्य का साथ मिलेगा और आप विभिन्न क्षेत्रों में सफलता का परचम लहराएंगे। किस्मत का साथ मिलने के कारण परिस्थितियाँ आपके अनुकूल हो जाएंगी। इस दौरान आपको लंबी यात्रा पर जाना पड़ सकता है। यह यात्रा आपके लिए फ़ायदेमंद साबित हो सकती है। समाज में अपनी सक्रियता बढ़ाने के लिए आप दान-दक्षिणा में भी अग्रणी रह सकते हैं। आप अपने कार्य में नैतिकता का पालन करेंगे और अपने सिद्धातों को आगे रखेंगे। पारिवारिक जीवन में भाई-बहन के साथ छोटी-मोटी कहासुनी हो सकती है। परंतु इस बीच आपको अपने गुस्से पर काबू रखना होगा। अन्यथा बात और भी बिगड़ सकती है।

उपाय: प्रतिदिन सूर्य मंत्र का जाप करें।

कन्या

सूर्य ग्रह आपकी राशि से अष्टम भाव में गोचर करेगा। वैदिक ज्योतिष में कुंडली के अष्टम भाव को आयुर्भाव कहा जाता है। इस भाव से जीवन में आने वाले उतार-चढ़ाव, अचानक से होने वाली घटनाएँ, आयु, रहस्य, शोध आदि को देखा जाता है। सूर्य के गोचर से आपको शारीरिक समस्याएँ हो सकती हैं। आपको बुखार, सिर दर्द के अलावा अन्य बीमारियाँ का सामना करना पड़ सकता है। ऐसी स्थिति में चिकित्सक की सलाह जरुर लें और अपनी सेहत का भी ध्यान रखें। इस अवधि में आपके ख़र्चों में वृद्धि होगी और किसी अनचाही यात्रा पर भी जाना पड़ सकता है। वाहन चलाते समय विशेष सावधानी बरतें और ट्रैफिक नियमों का उल्लंघन न करें। इसके अलावा हर किसी के साथ अपनी बातों को साझा न करें। अगर आप शादीशुदा हैं तो ससुराल पक्ष के साथ आपके रिश्ते मधुर हो सकते हैं। उनकी ओर से आपको किसी तरह का आर्थिक लाभ भी प्राप्त हो सकता है। किसी ग़ैर क़ानूनी कार्यों में संलिप्त न हों, अन्यथा आपको इसका बुरा अंजाम भुगतना पड़ सकता है।

उपाय: प्रतिदिन भगवान शिव की आराधना करें।


तुला

सूर्य आपकी राशि से सप्तम भाव में संचरण करेगा। ज्योतिष में कुंडली के सातवें भाव से व्यक्ति के वैवाहिक जीवन, जीवनसाथी एवं जीवन के अन्य क्षेत्रों में बनने वाले साझेदारों का विचार किया जाता है। इस भाव को विवाह भाव भी कहते हैं। वैवाहिक जीवन से जुड़े जातकों को सूर्य के इस गोचर के दौरान थोड़ा संभल कर रहना होगा। इस दौरान जीवनसाथी के साथ तालमेल बनाकर चलना होगा। किसी बात को लेकर उनके साथ बहसबाज़ी भी संभव है लेकिन आपको फिर भी स्थिति को संभालना होगा। जीवनसाथी की मदद से भी आपको आर्थिक लाभ संभव है। अगर आपका साथी नौकरी पेशा है तो उन्हें जॉब में तरक्की मिलने की संभावना है। ऐसा संभव है कि इस दौरान वह आप पर हावी होने का भी प्रयास करें, परंतु आपको उन्हें शांत अवस्था में रखना होगा। सामाजिक जीवन में आपका मान-सम्मान बढ़ेगा। अगर आप साझेदारी में व्यापार करते हैं तो आपको अपने बिज़नेस पार्टनर से अपने संबंध अच्छे बनाकर चलने होंगे। क्योंकि अगर आपके रिश्ते पार्टनर के साथ ख़राब हुए तो इसका असर सीधे व्यापार पर पड़ेगा, जो कि आप दोनों के लिए अच्छा नहीं होगा।

उपाय: बैल को गेहूँ खिलाएँ।

वृश्चिक

सूर्य आपकी चंद्र राशि से षष्टम भाव में गोचर करेगा। ज्योतिष में इस भाव को शत्रु भाव कहा जाता है। इस भाव से विरोधियों, रोग, पीडा़, जॉब, कॉम्टीशन, रोग प्रतिरोधक क्षमता, शादी-विवाह में अलगाव एवं क़ानूनी विवादों को देखा जाता है। सूर्य के इस गोचर के प्रभाव से वृश्चिक राशि के जातकों के साहस में वृद्धि होगी और आप किसी भी चुनौती को सहर्ष स्वीकार करने से पीछे नहीं हटेंगे। आप अपने विरोधियों अथवा शत्रुओं को आसानी से पराजित कर सकते हैं। वे आपका सामना करने से कतराएंगे। वहीं कार्य क्षेत्र में भी आपको शुभ समाचार मिलने की संभावना है। जॉब में आपको सफल परिणामों की प्राप्ति होगी। अगर आप नौकरी की तलाश कर रहे हैं उसमें भी आपको सफलता मिलने की प्रबल संभावना है। ऑफ़िस में सीनियर्स आपका मार्गदर्शन करेंगे। साथ ही ज़रुरत पड़ने पर वे आपकी सहायता के लिए भी तैयार रहेंगे। इस दौरान आपके ख़र्चों में वृद्धि होगी। लेकिन अगर आप चाहें तो इन ख़र्चों पर काबू भी किया जा सकेगा। दूसरी ओर, कानूनी विवाद का सामना भी करना पड़ सकता है। इसलिए ऐसे कार्यों से दूर रहें जिनमें आपको किसी तरह के क़ानूनी केस या क़ानूनी पचड़े का सामना करना पड़े।

उपाय: सूर्य देव को रोज़ाना जल चढ़ाएँ।

धनु

सूर्य आपकी राशि से पंचम भाव में गोचर करेगा। कुंडली में इस भाव को संतान भाव से जाना जाता है। इस भाव से रोमांस, संतान, रचनात्मकता, बौद्धिक क्षमता, उच्च शिक्षा एवं नए अवसरों को देखा जाता है। धनु राशि के जातकों को सूर्य के इस गोचर के दौरान आर्थिक लाभ होगा। इस अवधि में आपकी आय में वृद्धि होगी और आय के साधन बढ़ेंगे। वहीं संतान की ओर से आपको ख़ुशियाँ मिलेंगी। संतान अपने कार्यक्षेत्र में अच्छा प्रदर्शन करेगी। शिक्षा में उनका सराहनीय प्रदर्शन आपको गर्व महसूस कराएगा। प्रेम जीवन में अहंकार दखल दे सकता है, जिससे कि रिश्ते में तल्खियां बढ़ सकती हैं। लिहाज़ा इससे बचने का प्रयास करें और अपने प्रियतम की भावनाओं का सम्मान करें। कार्य क्षेत्र में आप नौकरी में परिवर्तन का विचार बना सकते हैं। वहीं भाई-बहन की मदद से आपको आर्थिक लाभ होने की संभावना भी है। छात्रों के लिए यह गोचर बहुत ही बढ़िया रह सकता है। इस दौरान आपकी मेहनत रंग लाएगी। हालाँकि सोशल मीडिया पर अधिक समय देने के कारण शिक्षा में व्यवधान पैदा हो सकता है। इसलिए अपने समय की कीमत को पहचानें और अपना समय सार्थक कार्यों में लगाएँ।

उपाय: भगवान शिव की आराधना करें।

मकर

सूर्य आपकी राशि से चतुर्थ भाव में गोचर करेगा। कुंडली के चौथे भाव को सुख भाव कहा जाता है। इस भाव से माता, जीवन में मिलने वाले सभी प्रकार के सुख, चल-अचल संपत्ति, लोकप्रियता एवं भावनाओं को देखा जाता है। गोचर के दौरान माता जी की सेहत में गिरावट नज़र आ सकती है। ऐसे में उनकी सेहत का ध्यान रखें और ज़रुरत पड़ने पर डॉक्टर से उनकी हेल्थ का चेक अप कराए। इस दौरान आपकी चल-अचल संपत्ति में वृद्धि होने की संभावना है। आप इस दौरान कोई वाहन या फिर नई प्रॉपर्टी ख़रीद सकते हैं। सूर्य के गोचर के प्रभाव से समाज में आपकी लोकप्रियता में वृद्धि हो सकती है। पारिवारिक जीवन में आप अपने परिजनों के ऊपर हावी होने का प्रयास कर सकते हैं, जिससे सकारात्मक पारिवारिक माहौल बिगड़ सकता है। वहीं कार्य क्षेत्र में आपका प्रदर्शन काबिल-ए-तारीफ़ होगा। सीनियर्स आपके कार्य की जमकर तारीफ़ करेंगे और इससे आपके प्रगति के दरवाज़े भी खुलेंगे। इस अवधि में आपको अचानक ही कोई ख़ुशख़बरी मिल सकती है। इस ख़बर से आपको प्रसन्नता का अनुभव होगा।

उपाय: शनि देव को सरसो का तेल चढ़ाएँ।

कुंभ

सूर्य आपकी राशि से तृतीय भाव में संचरण करेगा। कुंडली में तीसरे घर को सहज भाव कहा जाता है। इस भाव से व्यक्ति के साहस, इच्छा शक्ति, छोटे भाई, जिज्ञासा, जुनून, ऊर्जा, जोश और उत्साह को देखा जाता है। सूर्य के गोचर का प्रभाव आपके स्वभाव पर पड़ेगा। इस दौरान आप स्वयं को निडर पाएंगे और बेहद बेबाकी से निर्णय लेंगे। साथ ही आपकी ऊर्जा में वृद्धि होगी और आप कठिन से कठिन कार्य को आसानी से कर गुजरेंगे। वैवाहिक जीवन में जीवनसाथी की मदद से आर्थिक लाभ मिल सकता है। आपकी संवाद शैली में सकारात्मक बदलाव देखने को मिल सकता है, जिसकी सहायता से आप दूसरों पर अपनी छाप छोड़ने में सफल रहेंगे। आप अपने लक्ष्य के प्रति संकल्पबद्ध एवं महत्वकांक्षी रहेंगे। गोचर के दौरान आप किसी छोटी यात्रा पर जा सकते हैं। पारिवारिक जीवन में पिता जी की सेहत में थोड़ी गिरावट आ सकती है। लिहाज़ा उनकी सेहत का ख़्याल रखें। इसके अलावा इस अवधि में छोटे भाई-बहनों से आपकी कहासुनी हो सकती है। उनके स्वभाव में क्रोध की मात्रा बढ़ सकती है, लिहाज़ा उनके ऊपर थोड़ा ध्यान रखें।

उपाय: पीपल के वृक्ष को पानी चढ़ाएँ।

मीन

सूर्य आपकी राशि से द्वितीय भाव में संचरण करेगा। ज्योतिष में दूसरे भाव से व्यक्ति के परिवार, उसकी वाणी, प्रारंभिक शिक्षा एवं धन आदि का विचार किया जाता है। परिवार के कारण इसे कुटुंब भाव और धन के कारण इसे धन भाव भी कहा जाता है। सूर्य का गोचर आपकी भाषा में बदलाव लाएगा। इस दौरान आप दूसरों के प्रति कटु शब्दों का प्रयोग कर सकते हैं जिसके कारण लोग आपसे नाराज़ अथवा दुःखी हो सकते हैं। इसका प्रभाव मुख्य रूप से आपके रिश्तों पर देखने को मिल सकता है। इसलिए चाहें कम बोलें लेकिन मीठा बोलें। पारिवारिक जीवन में परिस्थितियां बहुत ज्यादा अनुकूल नहीं होगी। परिजनों के बीच तनाव की स्थिति देखने को मिल सकती है। घर में किसी बात को लेकर झगड़ा भी हो सकता है। ऐसे में आपको परिजनों के बीच सामंजस्य की स्थिति बनाने का प्रयास करना चाहिए। हालाँकि ससुराल पक्ष से रिश्ते थोड़े तल्ख़ रह सकते हैं। वहीं सेहत की दृष्टि से भी यह गोचर आपके लिए परेशानियाँ पैदा कर सकता है। इस दौरान आपको मानसिक तनाव की शिकायत रह सकती है। मानसिक तनाव से बचने के लिए मनोरंजन का सहारा लिया जा सकता है। सरकार की ओर से आपको लाभ मिलने की संभावना है। आर्थिक रूप से देखें तो इस अवधि में आपको किसी से पैसे उधार लेने पड़ने की स्थिति से रूबरू होना भी पद सकता है।

उपाय: रोज सुबह गौ माता को रोटी खिलाएँ।


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